मोक्षदा एकादशी 2025 : आज रखें व्रत, मिलेगा बैकुंठ धाम का द्वार

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राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू पंचांग के अनुसार आज एक दिसंबर 2025, सोमवार को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी है, जिसे मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस पावन तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अमर संदेश श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इसे गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है, पुण्य की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से केवल व्रती ही नहीं, उसके कुल के 21 पीढ़ियों के पूर्वज भी मोक्ष प्राप्त करते हैं।

मोक्षदा एकादशी 2025 तिथि एवं शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 नवंबर 2025, रात्रि 09:29 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त: 01 दिसंबर 2025, प्रातः 07:01 बजे तक

व्रत पारण का समय: 02 दिसंबर 2025, सुबह 06:50 से 09:05 बजे तक

उदया तिथि के अनुसार व्रत एक दिसंबर को ही रखा जाएगा।

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मोक्षदा एकादशी का धार्मिक महत्व

विष्णु पुराण और पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं महाभारत में अर्जुन को बताया था कि यह व्रत बैकुंठ प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है। इस दिन भगवान विष्णु के दामोदर रूप की पूजा की जाती है और गीता पाठ का विशेष फल मिलता है।

मोक्षदा एकादशी पूजा विधि (सरल तरीका)

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सूर्य को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर भगवान विष्णु-लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • पीले पुष्प, फल, केला, मौसमी फल, खरबूजे के बीज, तुलसी दल, पंचामृत और पीली मिठाई का भोग लगाएं।
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 11, 21 या 108 बार जप करें।
  • मोक्षदा एकादशी व्रत कथा एवं श्रीमद्भगवद्गीता (कम से कम अध्याय 11 या पूरा पाठ) का पाठ करें।
  • शाम को विष्णु-लक्ष्मी आरती करें, तुलसी माता को दीप दिखाएं।
  • रात्रि में भगवान के समक्ष जागरण या भजन-कीर्तन करें (ऐच्छिक)।
  • अगले दिन द्वादशी को विधि-विधान से व्रत पारण करें।

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गीता जयंती पर विशेष कार्य

श्रीमद्भगवद्गीता का पूरा या कम से कम 11वां अध्याय (विश्वरूप दर्शन) का पाठ अवश्य करें।

भगवान कृष्ण को तुलसी दल मिली मिश्री या माखन-मिश्री का भोग लगाएं।

गीता का दान करें या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं।

दान-पुण्य का महत्व

द्वादशी तिथि पर अन्न, वस्त्र, फल, छाता, जूते या धन का दान करने से व्रत का सौ गुना फल मिलता है। गरीबों, मंदिर या गौशाला में दान करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। इस प्रकार मोक्षदा एकादशी का व्रत न केवल व्यक्तिगत मुक्ति का द्वार खोलता है, बल्कि कुल के उद्धार का भी सशक्त माध्यम है। आज पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत रखें और भगवान दामोदर की कृपा प्राप्त करें।

 

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