कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के बिगड़े बोल…बलिया वालों को बताया दलाल

लखनऊ । निषाद पार्टी के मुखिया और मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने आज बलिया लोगों को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि बलिया के लोग अंग्रेजों के दलाल थे और वो आज भी दलाली कर रहे हैं। हालांकि वो किसकी दलाली कर रहे हैं ये तो वो नहीं बताए लेकिन उन्होंने आज बागी बलिया को पूरे देश के सामने दलाल ठहरा दिया। गौरतलब है कि अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की पहली चिंगारी बलिया में ही फूटी थी। मंगल पांडे भी बलिया के ही रहने वाले थे। उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख, संजय निषाद ने एक बार फिर अपने बयानों से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बार उनके निशाने पर बलिया ज़िले के लोग हैं, जिनके बारे में उन्होंने एक अत्यंत विवादित टिप्पणी की है। मंत्री निषाद ने बलिया के लोगों को ‘दलाल’ बताते हुए कहा कि यह मानसिकता कोई नई नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक रूप से चली आ रही है। उनके तीखे लहजे में दिए गए बयान के अनुसार, “बलिया के लोग अंग्रेज़ों के दलाल थे, और यह दलाली आज भी यहां जारी है।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘आज की दलाली’ का निशाना कौन है, लेकिन उन्होंने ‘बागी बलिया’ को सबके सामने ‘दलाल’ ठहरा कर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

 ‘बागी बलिया’ पर ऐतिहासिक हमला

मंत्री निषाद का यह बयान इसलिए भी अधिक विवादास्पद है, क्योंकि बलिया ज़िले का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक गौरवशाली और क्रांतिकारी इतिहास रहा है। बलिया को ‘बागी बलिया’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहीं से ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ बगावत की पहली चिंगारी भड़की थी। देश के पहले स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे भी इसी भूमि से संबंध रखते थे। निषाद का यह बयान ज़िले के उस आत्म-सम्मान और विरासत पर सीधा हमला है, जिसे पूरा देश सम्मान की दृष्टि से देखता है।

 2022 का वायरल वीडियो: समाज को जगाने की कोशिश

यह पहली बार नहीं है जब संजय निषाद ने बलिया में इस तरह के भड़काऊ बयान दिए हैं। नवंबर 2022 में, बलिया में निषाद समाज के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनका एक वीडियो वायरल हुआ था। उस समय, उनके तेवर बलिया की ‘बदलने की शक्ति’ पर केंद्रित थे, लेकिन साथ ही उन्होंने अपने समाज को आईना दिखाने की भी कोशिश की थी। उस वायरल वीडियो में उन्होंने बलिया की जनता के ‘गुस्से’ की सराहना करते हुए कहा था कि जब यहां के लोगों को गुस्सा आता है, तो वे ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकते हैं और देश में बदलाव लाते हैं।

‘गधे’ का उदाहरण और ‘दुश्मन’ को चुनना

मंत्री निषाद ने अपने समाज के लोगों को पिछले 70 वर्षों से ‘ग़लत’ नेताओं को चुनने के लिए एक विवादास्पद ‘गधे’ का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सबसे मूर्ख समझा जाने वाला यह जीव भी अपने पीछे खड़े व्यक्ति को अपना दुश्मन समझता है। लेकिन उनके समाज ने पिछले सात दशकों से उसी दुश्मन को चुनना जारी रखा है।

सवाल: अपने बच्चों के लिए क्या किया?

हालांकि, इसके बाद उन्होंने एक कठोर सवाल उठाया, जो सीधे तौर पर समाज की निष्क्रियता पर चोट करता है: आपने अपने बच्चों के लिए क्या किया? निषाद ने अपने समाज को सरकारी तंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों से लेकर BDO कार्यालय, DM कार्यालय तक, महत्वपूर्ण पदों पर उनके समाज का प्रतिनिधित्व ‘शून्य’ है। उन्होंने बेहद आक्रामक ढंग से कहा, “अगर आप पुलिस थाने जाते हैं तो वहां आपको कभी अपने समाज का कांस्टेबल नहीं मिलेगा। यहां तक कि BDO कार्यालय में चपरासी भी नहीं मिलेगा। DM कार्यालय में आपके समाज का क्लर्क नहीं मिलेगा। आप किसी भी विभाग में जाएंगे तो आप खुद को ज़ीरो पाएंगे।

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