नया लुक ब्यूरो
पटना। बस कुछ घंटो की बात है और बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ जाएंगे पर जिस तरह से शुरूआती रुझान में एनडीए आगे चल रही है उससे तो यही लग रहा है कि नीतीश कुमार की वापसी करने जा रहे हैं, यानि टाइगर जिन्दा है और दहाड़ने को तैयार है। खैर अभी तो शुरूआत है पर कहते हैं कि शुरूआत अच्छी हो तो अंत भी बेहतर होता है ऐसे में कयास लगाए जाने लगे हैं कि नीतीश बाबू का मुख्यमंत्री बनना तय लग रहा है।
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वैसे सियासत में इधर-उधर पलटी मारने में माहिर नीतीश कुमार 3 मार्च 2000 में पहली बार 7 दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाए और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ गयी। 2005 में दो बार विधानसभा के चुनाव हुए फरवरी में जब चुनाव हुए तो किसी को बहुमत नहीं मिला लेकिन अक्टूबर में जब चुनाव हुआ तो एनडीए को इस बार बहुमत मिल गई। नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन गए। इस बार 5 साल के लिए मुख्यमंत्री रहे और तब से करीब आठ महीने को छोड़ दिया जाए तो वे तब से लगातार मुख्यमंत्री बने हुए हैं। इसे यूं भी कह सकते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ लेने का तो रिकॉर्ड बना दिया है और अगर रुझान नतीजों में बदल गए तो नीतीश इस बार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड बना देंगे। सबसे ज्यादा बार सीएम बनने का रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम ही है। इसके बाद अब तक हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 6 बार सीएम पद की शपथ ली है और तमिलनाडु राज्य की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता भी 6 बार बतौर मुख्य.मंत्री शपथ ले चुकी हैं। इसके बाद सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले सिक्किम के पवन कुमार चामलिंग का नाम आता हैं,। उन्होंने 5 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु भी पांच बार ही सीएम पद की शपथ ले चुके हैं। पांच बार शपथ लेने वालों में अरुणाचल प्रदेश के गेगोंग अपांग ओडिशा के सीएम रहे नवीन पटनायक का नाम भी शामिल है। जाहिर है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के मामले में रिकॉर्ड नीतीश कुमार का ही नाम हैं।
अगर सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड की बात है तो यह सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज है। पवन कुमार चामलिंग 1994 से 2019 तक 24 साल 165 दिन तक मुख्यमंत्री रहे। उसके बाद नवीन पटनायक भी 2000 से 2024 तक लगातार 24 साल 99 दिन तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। इसके बाद नाम आता है पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु का जो 1977 से 2000 तक लगातार 23 वर्ष 14 दिन तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन रहे।
इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में गेगोंग अपांग 22 साल 250 दिन मुख्यमंत्री बने रहे और मिजोरम से लाल थनहवला 22 साल 7 दिन इस पद पर रहे जबकि हिमाचल से, वीरभद्र सिंह ने 21 साल 13 दिन तक सरकार चलायी। त्रिपुरा से माणिक सरकार 19 साल 363 दिन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर एम करुणानिधि 18 साल 362 आसीन रहे जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रकाश सिंह बादल 18 साल 350 दिन पंजाब के सीएम रहे जबकि वहीं नीतीश कुमार 18 साल, 347 दिन तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रहे।

