- पुलिसकर्मियों को मुख्यमंत्री ने दी सौगात, 20 प्रतिशत मंहगाई भत्ता में की बढ़ोतरी
- मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर लखनऊ पुलिस लाइन में शोक परेड की ली सलामी
- कहा शहीदों के परिवारीजनों और पुलिस के कल्याण के लिए सरकार कर रही काम
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले और बेहतर हुई है। अपराधियों में कानून का भय कायम हुआ है। वे अपनी जमानत तुड़वाकर कर जेल जा रहें हैं या फिर कारोबार करने में जुट गए हैं। अब मुठभेड़ में 257 कुख्यात अपराधी मारे गए, 15 हजार से अधिक घायल हुए और दस हजार के करीब अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। सरकार पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिए काम कर रही है। योगी मंगलवार को पुलिस स्मृति दिवस पर लखनऊ पुलिस लाइन में शोक परेड की सलामी लेने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जबसे उनकी सरकार आई है कानून-व्यवस्था को सुधारने के साथ-साथ पुलिस बल को मजबूत करने के लिए अनेक काम किए गए हैं।

यह दिन उन बहादुर जवानों की आत्माओं को याद करने के लिए समर्पित है। जिन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जान गंवाई। 1959 में चीन के साथ सीमा पर हुए एक हमले में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में इसकी शुरुआत हुई, इस मौके पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिनमें श्रद्धांजलि समारोह और शोक सभाएं शामिल होती हैं। यह दिन समाज में पुलिस बल के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बनता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण रिजर्व पुलिस लाइन पहुंचे। सीएम योगी ने रिजर्व पुलिस लाइन्स में मंगलवार को पुलिस स्मृति दिवस पर परेड की सलामी ली। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में इस वर्ष शहीद हुए पुलिस के तीन जवानों यूपी एसटीएफ में तैनात निरीक्षक सुनील कुमार को बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी।

यह घटना 20 जनवरी 2025 को हुई थी तब निरीक्षक सुनील कुमार टीम के साथ जनपद शामली के बिडौली चैसाना चौराहे पर बदमाशों को दबोचने के लिए घेरेबंदी की थी। वहीं मुख्य आरक्षी दुर्गेश कुमार सिंह को जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र में बदमाशों ने जान से मारने की नीयत से उनके ऊपर वाहन चढ़ा दिया, जिससे उनकी मौत हो गई थी। जबकि गाजियाबाद जिले के नहाल मसूरी थाना क्षेत्र में बेख़ौफ़ बदमाशों ने पुलिस के जवान सौरभ कुमार के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को शहीद हुए तीनों पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर तीनों परिवार को सम्मानित भी किया।

नम आंखों में चमक उठी शहादत
सम्मान समारोह में शामिल हुए शहीदों के परिवारीजन अपनों को खोने का दर्द कोई बांट नहीं सकता। वक्त भी शायद ही उनके जख्मों को भर सके, लेकिन मंगलवार को शहीदों के सम्मान में जब सैकड़ों शीश झुके तो इंस्पेक्टर सुनील कुमार, आरक्षी दुर्गेश कुमार सिंह व आरक्षी सौरभ कुमार के घरवालों का सिर फक्र से ऊंचा हो गया। आंखों से झरझर आंसू बह रहे थे पर उनकी नमी में गर्व भी था, जिसे वह जिंदगी भर सीने में समेट कर रखेंगे।

अपनों की याद में छलक पड़ीं आंखें
शहीद हुए सुनील कुमार की पत्नी मुनीद देवी, दुर्गेश कुमार सिंह की पत्नी अपने ढाई वर्षीय मासूम बच्चे अपूर्णा के साथ प्रियंका सिंह व सौरभ कुमार की पत्नी आयुशी परिजनों के साथ पुलिस लाइन पहुंची। शोक परेड के बाद इन सभी से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात कर हर संभव सुविधा दिलाए जाने का भरोसा दिलाया। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारवालों को कड़े सुरक्षा के घेरे में ले रखा था। ताकि मीडिया कर्मी उनसे अधिक बातचीत न कर सकें।
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि कुछ साल पहले शहीद स्मृति दिवस के मौके पर पत्रकारों ने जब शहीदों के घरवालों से बातचीत की थी तो उन्होंने महकमे से होने वाली दिक्कतों को भी खुलकर बताया था। इस पर पुलिस के आलाधिकारियों ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाकर उनकी समस्याओं को सुना था। इसी कारण हर साल घरवालों के साथ पहले से महिला पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया था। जिन्होंने समारोह खत्म होते ही घरवालों को कारों बैठाकर पुलिस लाइंस से रवाना कर दिया।

शहीदों के सम्मान में झुके शस्त्र और शीश
पुलिस लाइन में मंगलवार की सुबह अलग थी। शहीद पुलिसकर्मियों के सम्मान में शस्त्र और शीश दोनों झुके थे। शोक धुन बजते ही शहीदों की याद में कई आंखें नम हो गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डीजीपी राजीव कृष्ण, पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर स्थापित की गई शोक पुस्तिका पर पुष्पचक्र चढ़ाकर अमर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
