भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार मुक्त अभियान सोनौली बॉर्डर पर तार-तार

  • महराजगंज जनपद के सीमावर्ती थानों और चौकियों पर वर्षों से कुंडली मारकर बैठे हैं लगभग आधा दर्जन सिपाही
  • जिले में चरस के साथ पहले भी पकड़ा जा चुका है एक दरोगा
  • सीमा पर लंबे जाम का मुख्य कारण मालवाहक ट्रकों से अवैध वसूली

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

महराजगंज। महराजगंज जनपद के सीमावर्ती थानों और चौकियों पर वर्षों से कुंडली मारकर बैठे आधा दर्जन सिपाहियों के अवैध वसूली में पूरी तरह से लिप्त के समाचार मिल रहे हैं। आखिर जो भी पुलिसकर्मी यहां कुंडली मारकर बैठे हैं उन पर कौन मेहरबान है यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है? पुलिस सूत्रों के मुताबिक जनपद मुख्यालय पर तैनात कुछ ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिनका एक संगठन है जो केवल धनादोहन कर भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग कराने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।

इतना ही नहीं अगर किसी का ट्रांसफर होता भी है तो वे थोड़े दिनों के लिए हटा दिए जाते हैं और पुनः सीमावर्ती थाने और चौकियों पर पोस्ट कर दिए जाते हैं। इस तरह घूम फिर कर वह सीमावर्ती इलाकों में में हीं तीन से चार साल का समय व्यतीत कर तस्करों से धन उगाही कर करोड़पति बन जाते हैं। कुछ लोग तो अपनी निजी गाड़ियों में पुलिस का स्टीकर लगाकर टैक्सी में चलवाने भी काम करते हैं। मालवाहक वाहनों,विना परमिट की चलने वाली बसों,निजी टैक्सियों से अवैध वसूली इनकी दिनचर्या बन गई है। बता दें कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रदीप गुप्ता के कार्यकाल की बात करें तो जिले के सीमावर्ती थानों और पुलिस चौकियों पर आज भी ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिनकी पोस्टिंग उन्होंने की थी, उसके बाद आज तक कई वर्षों से कुंडली मारकर बैठे पुलिसकर्मियों को नहीं हटाया जा सका। आखिर इन पुलिसकर्मियों को कौन हटाएगा जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के तमाम आरोप पहले भी लग चुकें हैं। बीते दिनों एक उपनिरीक्षक को चरस के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जो मादक पदार्थों की तस्करी में पूरी तरह से लिप्त पाया गया था।

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सोनौली एक अंतर्राष्ट्रीय महत्व की नागरिक पुलिस चौकी है। जहां चौकी से आधा दर्जन चौकी प्रभारी,कोतवाली के चार थानेदार और नौतनवां सर्किल से चार पुलिस क्षेत्राधिकारी बदल दिए गए हैं। लेकिन इन बदलावों के बाद भी कुछ दरोगा,सिपाही और दीवान झुलनीपुर से कोल्हुई तक विगत चार वर्षों से गणेश परिक्रमा कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन्हीं पुलिसकर्मियों की हरकतों की वजह से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बदनाम हो रही है। जिसका असर बीते लोकसभा चुनाव के परिणाम में भी देखने को मिला। बीते सालों में एसएसबी जवानों पर हमला होना भी पुलिस के लिए एक चुनौती बना था। ऐसे तस्करों और अराजक तत्वों को आखिर किसका आशिर्वाद है जिन्होंने अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों और जवानों पर जान लेवा हमला कर उन्हें जान से मारने की कोशिश की। बेशक पुलिस ने कुछ तस्करों को समय-समय पर गिरफ्तार भी किया है पर इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई,इनके घरों पर बुल्डोजर क्यों नहीं चलवाया जाता यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है?

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पुलिस अधिकारियों को सरहद पर तैनात सभी पुलिस कर्मियों के नेपाली और भारतीय सिम के काल डीटेल की जांच करने की जरूरत है। इस जांच से साफ तौर पर स्पष्ट हो जाएगा कि किस पुलिसकर्मी के सिम में कितने तस्करों नंबर फीड हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार सोनौली चौकी, नौतनवां थाने पर तैनात आधा दर्जन सिपाही पिछले तीन वर्षों से आधा दर्जन चौकी प्रभारियों के स्थानांतरण के बाद भी कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। इसका असर यह हुआ है कि जो भी चौकी प्रभारी आता है, वह इन सिपाहियों का चहेता बन जाता है, जिसके कारण अन्य सिपाही अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इसमें से कुछ सिपाही अपने आप को चौकी प्रभारी से कम नहीं समझते और कभी-कभी स्थानीय स्तर पर सिपाहियों की ड्यूटी से लेकर शिकायतों तक की देखरेख करते है। सीमा पर विभिन्न प्रकार के वैध और अवैध कार्यों का पूरा हिसाब-किताब रखने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर रहता है।

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सोनौली में टैक्सी स्टैंड के पास पुलिस ने एक गुप्त स्थान बनाया है जहां भारत से नेपाल जाने वाले मालवाहक ट्रकों से अवैध वसूली की बात सामने आ रही है। इन्हीं कारणों से सोनौली बार्डर पर हमेशा लंबा जाम लगा रहता है जिसके कारण आम आदमी का रास्ता चलना दूभर हो गया है। सड़क पर बेतरतीब खड़े मालवाहक ट्रकों से आम आदमी की जान को हमेशा खतरा बना रहता है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। राजस्थान के एक चालक ने अपना नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि यहां कस्टम से आवश्यक प्रपत्र पास कराने के बाद भी सिपाहियों द्वारा ट्रकों को घंटों-घंटों रोककर पैसे के लिए परेशान किया जाता है और पैसा लेने के बाद ही ट्रकों को आगे जाने की इजाजत दे रहे हैं। इतना ही नहीं इस समय दो से पांच हजार रुपए लेकर लंबी दूरी की गाड़ियों की कटिंग भी कराई जा रही है।‌ यही वजह है की सरहद पर हमेशा जाम की समस्या बनी रहती है। ऐसे में अब देखना होगा कि पुलिस के उच्चाधिकारी इन पुलिसकर्मियों पर कब और कितने दिनों में एक्सन लेंगे।

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