- सत्तारुढ़ पार्टी के नेताओं का संरक्षण होने से नहीं होती कोई कार्रवाई
- अवैध वसूली में सहयोग नहीं करने वाले सुरक्षाकर्मी हो रहे दंडित
- राशन में अनाप शनाप कटौती कर बंदियों को परोसा जा रहा घटिया भोजन
लखनऊ। मुजफ्फरनगर के बाद कासगंज जेल में भी प्रोन्नति अधीक्षक ने आतंक मचा रखा है। अधीक्षक की कार्यप्रणाली से बंदियों के साथ जेल के सुरक्षाकर्मी भी दहशत में है। अधीक्षक की बेतहाशा वसूली से बंदियों में खासा आक्रोश व्याप्त है। मजे की बात यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं का संरक्षण प्राप्त होने की वजह से शासन भी अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने से बचता नजर आ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक मुजफ्फरनगर में जेलर और प्रोन्नत के बाद कासगंज जेल के अधीक्षक बने राजेश कुमार सिंह का विवादों से गहरा नाता रहा है। मुजफ्फरनगर जेल में बतौर जेलर रहने के दौरान मशक्कत, बैठकी की अवैध वसूली को लेकर लंबे समय तक वह सुर्खियों में रहे। यह वसूली प्रिटिशन रायटर के माध्यम से कराई जाती थी। सूत्र बताते है कि बीती 12 अप्रैल 2025 को तत्कालीन डीजी जेल पीवी रामाशास्त्री मुजफ्फरनगर जेल का निरीक्षण करने गए थे। मुलाकातघर के निरीक्षण के दौरान शामली जिले के जिजौला गांव निवासी अनीसा नाम की महिला मुलाकाती ने डीजी जेल से शिकायत की कि उनका देवर मादक द्रव्यों की आपूर्ति के मामले में जेल में बंद है। उससे गिनती कटवाने के नाम पर 21 हजार रुपए की मांग की जा रही है। डीजी ने महिला से शिकायती पत्र लेकर जांच का आदेश दिया। सेटिंग गेटिंग के चलते इस मामले में आज तक इसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके साथ ही सपा के पूर्व विधायक शाहनवाज राणा को जेल के अंदर मोबाइल फोन इस्तेमाल करते पकड़ा गया था। इस मामले में भी जेलर की भूमिका संदिग्ध थी। पूर्व विधायक की जेल बदल दी गई किंतु शासन, मुख्यालय और राजनैतिक संरक्षण की वजह से इसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।
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सूत्रों का कहना है कि मुजफ्फरनगर के बाद कासगंज जेल में भी अधीक्षक राजेश कुमार सिंह आतंक मचा रखा है। बंदियों के राशन में बेतहाशा कटौती कर बंदियों को घटिया भोजन परोसा जाने लगा। इससे नाराज होकर बंदी भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। इसके साथ ही अधीक्षक ने बंदियों को ड्यूटी डंडा घड़ी पर लगाकर सुरक्षाकर्मियों का उत्पीड़न शुरू कर दिया। बैरियर गेट पर ड्यूटी करने वाले वार्डर को निर्देश दिया कि मोबाइल जमा करने वाले आगंतुकों से प्रति मोबाइल 50 रुपए वसूल किए जाए। इसके साथ ही मनमाने दामों पर गिनती कटवाने के साथ अन्य मदो से मोटी रकम वसूल की जा रही है। सूत्रों की माने तो वसूली में सहयोग नहीं करने वाले हेड वार्डर और वार्डर को दंडित भी किया जा रहा है। अधीक्षक की इस तानाशाही से बंदियों के साथ जेलकर्मियों में भी खासा आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग और महानिदेशक कारागार पीसी मीणा से काफी प्रयासों के बाद भी बात नहीं हो पाई।
