- बिना किसी अधीनस्थ पर गरजे सात बरसों तक सूचना निदेशक बने रहे ‘सिंह’
- पत्रकारों की सेल्फी और फोटो खिंचाने की ललक से पता चलता है उनका व्यक्तित्व
शेखर पंडित
उत्तर प्रदेश के हृदय स्थल यानी हजरतगंज के पंडित दीनदलाय उपाध्याय सूचना परिसर से निकलकर डाली बाग मार्ग स्थित 8-खादी भवन पहुंच चुके पूर्व सूचना निदेशक का जलवा अभी भी पत्रकारों के बीच कायम है। ‘अबकी दिवाली-माटी कलावाली’ के स्लोगन से सजे माटी कला महोत्सव में उनके इर्द-गिर्द भारी संख्या में पत्रकारों का जमावड़ा रहा। हालांकि कार्यक्रम का शुभारम्भ विभाग के मंत्री राकेश सचान ने किया, लेकिन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शिशिर की उपस्थिति माहौल बनाने के लिए काफी थी। गौरतलब है कि आधुनिक सुविधा से लैस पंडित दीनदयाल उपाध्याय सूचना परिसर का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तब के सूचना निदेशक शिशिर ने ही कराया था।

शिशिर ऋतु में दिन छोटे और रातें लम्बी होती हैं। वातावरण में सूर्य के ‘अमृत तत्व’ की प्रधानता होती है, और शाक-भाजी व फल काफी पुष्ट होते हैं। छह ऋतुओं में आखिरी ‘शिशिर’ को ही माना जाता है। उसके बाद शुरू होती है- ग्रीष्म यानी तपन। 10 दिवसीय माटी कला महोत्सव पर्व का शुभारम्भ करने आए मंत्री राकेश सचान से ज्यादा किसी की चर्चा और सरगर्मी थी, वो थे पूर्व सूचना निदेशक शिशिर सिंह। पीसीएस अधिकारी रहते हुए उन्होंने मई 2017 में सूचना विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी और आईएएस होने के बाद पांच बरसों तक निदेशक की कुर्सी पर जमे रहे। यानी कुल सात बरसों तक उन्होंने सूचना निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मंदिर के लोकार्पण समारोह से लेकर प्रयागराज के महाकुम्भ तक उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के छवि को खूब चमकाया।

छोटी-छोटी घटना तूल न पकड़ सके, सूबे में एक अलग सोशल मीडिया का विंग बनाया और योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश के बाहर पूरे देश में एक बड़े नेता की छवि बना डाली। अब वो खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के सीईओ हैं। इस दबे-कुचले और पिछड़े विभाग को निवर्तमान प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने चमकाया था, लेकिन उसे सूर्य जैसी दमकती आभा में लाने का सफल प्रयास शिशिर ने किया है। दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे योगी आदित्यनाथ को देश के फलक पर पहुंचाने का श्रेय शिशिर को ही जाता है। राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस से लेकर दिल्ली में सरपट भाग रही मेट्रो रेल को यूपी सरकार के विज्ञापनों से पाटकर उन्होंने कई जगहों पर अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में ही जबरदस्त टक्कर दिया था।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह कहते हैं कि शिशिर ने सूचना विभाग में रहते हुए जो लकीर खींच दी, वो कोई नहीं पार कर सकता। पूर्व सूचना निदेशक की ‘गुडबुक’ में शामिल श्यामल त्रिपाठी कहते हैं कि पूर्व प्रमुख सचिव नवनीत सहगल के बाद शिशिर ही ऐसे अफसर सूचना में रहे, जिन्हें मीडिया के लोग हद से ज्यादा प्यार करते हैं। यानी पत्रकारों के बीच शिशिर का व्यक्तित्व अभी भी ‘विशाल’ है। विनीत गुप्ता की मानें तो पत्रकारों के बीच जो लोकप्रियता शिशर ने हासिल की, वो प्राप्त कर पाना आने वाले कई निदेशकों के लिए कठिन साबित होगा। कुल मिलाकर वो शिशिर ऋतु की तरह हैं, जो पतझड़ के बाद पेड़ों को ताजगी की ओर ले जाते हैं। मौसम को पूरी तरह से बदल देते हैं, गर्म कपड़े अलग हो जाते हैं, जो जुड़ता है वो गर्मजोशी से जुड़ता है।
क्या था अवसर
शुक्रवार को माटीकला बोर्ड द्वारा विकसित नवीन माटीकला पोर्टल एवं ई-वेरिफिकेशन मोबाइल एप का भी लोकार्पण किया गया। साथ ही 10 कारीगरों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक, दो कारीगरों को पगमिल मशीन एवं दो लाभार्थियों को बैंकों से स्वीकृत ऋण के चेक वितरित किए गए। दीपावली के शुभ अवसर पर आरंभ हुए इस 10 दिवसीय महोत्सव में विभिन्न जिलों से आए कारीगरों की 50 निःशुल्क दुकानें लगाई गई हैं, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक माटीकला उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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विभागीय कर्मचारियों से ज्यादा जमा थे पत्रकार
खादी भवन में शुक्रवार को प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी, हथकरघा एवं वस्त्र मंत्री राकेश सचान ने माटीकला महोत्सव 2025 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों से ज्यादा संख्या में पत्रकार उपस्थित थे। मंत्री राकेश सचान को यू-ट्यूबरों यानी आधुनिक मीडिया के लोगों ने घेर रखा था, लेकिन पूर्व सूचना निदेशक के पास भारी संख्या में पत्रकारों का जमावड़ा था। वो एक-एक करके सबसे मिल भी रहे थे। सेल्फी से लेकर फोटो तक खिंचाने में वो पत्रकारों के साथ जुटे रहे। वहीं बहुत से पत्रकार उन ‘विशेष पलों’ को कैद करके सोशल मीडिया पर डालने के लिए लालायित भी दिखे।
नवकवि पुरुषोत्तम कुमार के शब्दों में…
नव-वधु सी नव-श्रृंगार, कर रही ये वसुंधरा,
जीर्ण काया को सँवार, निहार रही खुद को जरा,
हरियाली ऊतार, तन को निखार रही ये जरा,
शिशिर की ये पुकार, सँवार खुद को जरा…..
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