बलराम कुमार मणि त्रिपाठी
आया दिन 15अगस्त का।
स्मृतियों के द्वार खोलता।।
बलिदानों बीरो की गाथा-
के पन्ने हर साल खोलता।।1।।
नफरत के जब बीज पनपते।
धर्म जाति मे हम बंट जाते।।
क्षणिक स्वार्थ मे तन्मय होते।
तभी गुलामी मे फंस जाते।।2।।
रक्त हमारा बहुत बहा है।
धोखा बारंबार हुआ है।।
कभी मुगल आकर घेरे हैं।
अंग्रेजो की मार सहा है।।3।।
बीत चुके वे दुर्दिन अपने।
जब हमको दुर्गति घेरे था।।
अलग थलग हो हम जीते थे।
मार और अपमान सहे थे।।4।।
कई बार हमने कोशिश की।
तोड़ें यह जंजीर गुलामी।।
किंतु एकता नहीं बन सकी।
बारंबार मिली नाकामी।।5।।
हिंसा से पाना चाहा था।
बम फोड़े बंदूक चलाये।।
सत्ता शासन से टकराकर।
चाहा था आजादी पायें।6।।
किंतु राष्ट्र के लोग बंटे थे।
कुछ सत्ता के साथ सटे थे।।
अपने ही लोगों के ऊपर।
कहर ढा रहे लोग खड़े थे।।7।।
तब युगपुरुष एक था आया।
हिंसा त्याग अहिंसा लाया।।
सत्याग्रह का दीप जला कर।
दिल जोड़ा एकता कराया।।8।।
लाठी सह कर भी मत हिलना।
हिंसा का प्रतिशोध न करना।।
दृढ़ संकल्प हृदय ये रखकर।
है अधर्म से हमको लड़ना।।9।।
लाखों लोग सड़क पर उतरे।
अंग्रेजों के छक्के छूटे।।
जनजागरण हो गया इतना।
जेल भर गए पंक्ति न टूटे।।10।।
युवा वृद्ध बालक महिलायें।
हिंदू मुस्लिम पीर मौलवी।।
जैनी सिख पारसी अनेकों-
हुए एकजुट साधु संत भी ।।11।

भारत को आजाद करेंगे।
सत्याग्रह की आन चढ़ेंगे।।
मातृभूमि की बलिवेदी पर।
अपने को कुर्बान करेंगे।।12।।
कभी विदेशी वस्त्र जलाया।
नहीं मृत्यु से कभी डरे हम।।
चरखा चला पहन ली खादी।
सदा न्याय के लिए लड़े हम।13।।
जोर पकड़ ली आंदोलन ने।
तब हमने संकल्प ले लिया।।
“अंग्रेजों तुम भारत छोड़ो ।”
‘करो-मरो’का मंंत्र दे दिया।।14।।
भारत के सब जेल भर गए।
अंग्रेजी शासन थर्राया।।
देख बयालिस के हुजूम को।
सत्ता भी कुछ समझ न पाया।।15।।
आखिर सन सैंतालिस आया।
फिर सत्ता ने दांव चल दिया।।
हिंदू मुस्लिम बीच लड़ा कर।
इक शतरंजी चाल चल दिया।।16।।
जिन्ना अड़ा विभाजन कर दो।
मुस्लिम पाकिस्तान रहे़ंगे।।
मारकाट मच गया परस्पर।
बचे जो हिंदुस्तान रहेंगे।।17।।
गांधी हिंसा लगे रोकने।
करने लगे आमरण अनशन।।
बहस चली समझाया सबने।
किंतु न मिट पाई यह अनबन।।18।।
आखिर मे बंट गया देश यह।
घाव लिए आजादी आई।।
दिन था वह पंद्रह अगस्त का।
जब हमने आजादी पाई।।19।।
लाल किले से अर्द्ध रात्रि मे।
उतरा अंग्रेजों का झंडा।।
पंडित नेहरु के हाथों से-
लालकिले लहराया तिरंगा।।20।।
भारत माता की जय बोलो।
अमर शहीदों की जय बोलो।।
अपनी मातृभूमि के खातिर
लहू बहा, उनकी जय बोलो।।21।
जय हिंद। जय भारत।।
