Exclusive episode-3: आपातकाल (इमरजेंसी) और मेरी यादें

एक बार सूरत शहर के गुजरात का भाजपाई मुख्यमंत्री।तो चाय की तलब लगी। जार्ज भी गाड़ी से बाहर उतरें वहीं एक और सिख मिल गया और जार्ज से पंजाबी में बतियाने लगा। इस कन्नड़भाषी ईसाई को बड़ी कठिनाई से साड्डा, तुस्सी और गल शब्द रटाये थे। सत्श्री अकाल सिखाया था। इसके पहले कि असली सिख नकली सिख को पकड़ लेता मैं जार्ज को गाड़ी पर लाद कर फुर्र हो गया।

आज 50 वर्ष पूर्व की कुछ घटनायें दिमाग में धूमकर आ जाती हैं। खासकर बड़ौदा जेल वाली। एक रिपोर्टर ने अदालती पेशी पर पूछा कि कौन सी चीज याद आती है और किस की कमी अखरती है मैंने जवाब दिया कि जेल में टेलिफोन की घंटी नहीं सुनाई पड़ती, जो बड़ी कचोटती है। अखबार भी नहीं मिलते। मगर यह की कमी धीरे-धीरे दूर हो गई, जब एक युवक बड़ौदा जेल में रोज अखबारों का बण्डल दे जाता था, और जेलर साहब मेहरबान हो जाते। बाद में पता चला कि यह फुर्तीला युवक एक स्वयं सेवक था जिसका नाम है नरेन्द्र दामोदर दास मोदी, अघुना गुजरात का भाजपाई मुख्यमंत्री।

एक अन्य याद है मेरे तनहा सैल की, जहां केवल फांसी की सजा पानेवाले ही रखे जाते थे। यहां मेरे पहले रहे कैदी ने दीवाल पर लिखा था कि ‘‘यह दिन भी बीत जाएगा।’’ बड़ा ढाढस बन्धता था कि आपातकाल की अंधेरी सुरंग के उस छोर में रोशनी दिखेगी, शीघ्र।
लेकिन मधुरतम घटना थी जब तिहाड़ जेल के सत्रह नम्बर वार्ड में उस रात के अन्तिम पहर में पाकेट ट्रांसिस्टर पर वाॅयस आॅफ अमरीका के समाचार वाचक ने उद्घोषण की कि राय बरेली चुनाव क्षेत्र में कांग्रेसी उम्मीदवार के पोलिंग एजेन्ट ने निर्वाचन अधिकारी से मांग की कि मतगणना फिर से की जाय। मै तब उछल पड़ा। जार्ज फर्नाण्डिस को जगाया और बताया कि,‘‘इन्दिरा गांधी पराजित हो गई।

’ पूरे जेल मे ंबात फैल गई। तारीख मार्च 17, 1977 थी, लगा दीपावलि आठ माह पूर्व आ गई। सारे जेल में लाइट जल उठीं। विजय रागिनी बज उठी। आखिर तानाशाह मतदाताओं द्वारा धराशायी हो गया।

Analysis homeslider International

युवा रैपर और काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह के हाथ होगी नेपाल की कमान

टाइम मैगज़ीन ने वालेन शाह को 2023 की ‘भविष्य को आकार देने वाले 100 उभरते नेताओं’ की सूची में शामिल किया था। टाइम मैगजीन की उस घोषणा के अभी दो वर्ष ही हुए हैं। नेपाल में पिछले वर्ष दो दिनों के अत्यंत हिंसक आंदोलन के बाद जब सभी राजनीतिक विकल्प झुलस चुके थे , प्रधानमंत्री […]

Read More
Analysis Bihar homeslider

हट बे ‘पलटूराम’! सीएम साहब आ रहे हैं

बुद्ध के आनंद से जॉर्ज के चेले तक, मौका-परस्ती की वो दास्तां एपस्टीन-फाइल का सौदा या सियासत की आखिरी सांस? कहाँ बुद्ध और जॉर्ज और कहा आनंद व नितीश कुमार आत्मसमर्पण! लक्ष्य से भागा धावक, ट्रैक छोड़ गुजरात के पांव पर कुमार सौवीर बात बिहार पर। जमीन भी बिहार की, घटनाएं भी बिहार की और […]

Read More
Analysis

जन्मदिन पर विशेष : आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री: युग के वास्तविक भारत रत्न

लखनऊ। छायावाद के अंतिम स्तंभ, संस्कृत और हिंदी साहित्य के अप्रतिम विद्वान और ‘निराला’  के प्रिय आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री  की पावन स्मृति को समर्पित एक विशेष पोस्ट आज हम नमन कर रहे हैं उस मनीषी को, जिनकी लेखनी में संस्कृत की शास्त्रीय गरिमा और हिंदी की सहज तरलता का अद्भुत संगम था। आचार्य जानकी […]

Read More