जानिए हवन को पूर्ण करने की विधि, क्या होता है दशांश हवन?

जयपुर से राजेंद्र गुप्ता

यदि आप किसी मंत्र का जाप कर रहे हैं या उसे सिद्ध करना चाहते हैं तो आपको यह भी जानना होगा कि किसी भी मंत्र को पूर्ण करने के लिए उसके दशांश हवन की आवश्यकता पड़ती है। हवन करना शास्त्रों में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। भारतीय परम्पराओ में हवन अथवा यज्ञ को बहुत महत्व बताया गया है।

दशांश हवन प्रत्येक मंत्रो को सिद्ध करने के बाद किया जाता है। जिसके अंतर्गत मन्त्र जप का दसवा हिस्सा आहुतियों के माद्यम से सिद्ध किया जाता है। मान लीजिये हमने 125000 जप किये है तो हमें कुल के दसवां भाग 12500 जप का हवन करना होता है। इसको समझने के लिए हम तालिका का प्रयोग करेंगे :

क्र. जप संख्या कर्म विधान

1 125000 कुल मंत्र जप

2 125000/10= 12500 हवन आहुतियां

3 12500/10 = 1250 तर्पण

4. 1250/10 = 125 मार्जन

5 125/10 = 12 ब्रह्म या कन्या भोज

दशांश हवन: उपरोक्त दी गई तालिका के माद्यम से हम समझ सकते है कि सपूर्ण दशांश हवन कैसे किया जाये। यदि किसी कारणवश तर्पण ,मार्जन या कन्या भोज में असमर्थ है तो आप उससे दुगना जप करके भी सिद्ध मान सकते है। लेकिन कुछ मतानुसार हवन कर्म करने से देवताओ को शक्ति मिलती है अर्थात मंत्र हवन से अधिक लाभ मिलता है।

दशांश हवन: हवन से पहले हमें सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी। सर्वप्रथम सामग्री पर विचार कर लेते है :

कुण्ड : अगर हम जमीन पर बना रहे है तो अति उत्तम माना जाता है। अगर किसी कारण से जमीन पर नहीं बनाया जा सके तो आप किसी भी पात्र का चयन कर सकते है। 12500 आहुतियों के लिए लगभग 2X2 कि लम्बाई चोड़ाई होना चाहिए तथा गहराइ 1.6 इंच लगभग होना चाहिए।\

आसन: कुश का आसन हो तो बहुत ही अच्छा है अन्यथा आप कोई भी ऊनि आसन का प्रयोग कर सकते है।

जलपात्र : आपको ताम्बे का लोटा तथा एक बड़ा पात्र जिसमे 1-2 लीटर पानी आ जाये तर्पण ,मार्जन के लिए आवश्यकता पड़ेगी।

हवन लकड़ी/समिधा : अधिकांशतः आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह आसानी से उपलब्द हो जाता है। शास्त्रों में अन्य लकड़ियों को भी विवरण मिलता है। गृह शांति के लिए गृह अनुसार भी लकड़ी प्रयोग में लाई जाती है। सूर्य: मदार, चन्द्र: पलाश, मंगल : खैर, बुध: चिड़चिड, बृहस्पति: पीपल, शुक्र: गूलर, शनि: शमी, राहु: दूर्वा केतु: कुशा की लकड़ी उपयोगी है।

नारियल गोला/बाटकी: पूर्ण आहुति के लिए नारियल की बाटकी की आवश्यकता पड़ेगी।

हविष्य या आहुति सामग्री: सर्वप्रथम हमें घी लेकर आ जाये। अलग अलग प्रकार के हवन में अलग अलग सामग्री उपयोग में लाई जाती है। सामान्यतः पांच तरह की सामग्री मिलाकर पंचांग धुप बना सकते है : 100 ग्राम तिल, 80 ग्राम मिश्री , 50 ग्राम जों , 25 ग्राम चावल, 25 नारियल बूरा। आप मार्केट से भी सामग्री ला सकते है। लक्ष्मी जी के दशांश हवन के लिए आप सिर्फ कमलगट्टे और घी से भी आहुतियाँ दे सकते है।

सामान्य पंचोपचार पूजन सामग्री। नवग्रह लकड़ी, कपूर,शक्कर,फल ,मेवा आदि।

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