ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है अमेरिका! टकर कार्लसन का बड़ा दावा

Nuclear attack on Iran: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मशहूर अमेरिकी पत्रकार और टीवी होस्ट टकर कार्लसन ने आशंका जताई है कि अमेरिका आने वाले कुछ दिनों में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है। कार्लसन के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहे हैं।

हालांकि, अमेरिका की सेना, व्हाइट हाउस या इजरायल सरकार की ओर से परमाणु हमले की किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। टकर कार्लसन ने अपने दावे में एक जानकार का हवाला देते हुए कहा है कि नेतन्याहू रोजाना ट्रंप से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें ईरान के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अगले कुछ दिनों में इस दिशा में बड़ा फैसला ले सकता है।

ईरान के किस इलाके को निशाना बनाने का दावा?

कार्लसन ने अपने दावे में मध्य ईरान के एक पहाड़ी इलाके का जिक्र किया है। उनका कहना है कि इजरायली खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस इलाके में ईरान का परमाणु कार्यक्रम संचालित हो रहा है। वहां बेहद मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे सुरंगें और कथित परमाणु ठिकाने मौजूद हैं।

कार्लसन का दावा है कि करीब 300 फीट मोटी ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे बने इन ठिकानों को सामान्य अमेरिकी हथियारों से नष्ट करना मुश्किल है। ऐसे में परमाणु हथियार के इस्तेमाल को ही एक सैन्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिका की ओर से परमाणु हमले की किसी योजना का ऐलान नहीं किया गया है।

नेतन्याहू की कुर्सी बचाने के लिए युद्ध का दबाव?

टकर कार्लसन ने इस पूरे घटनाक्रम को इजरायल की घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देखा है। उनका दावा है कि हालिया चुनावी नतीजों के बाद नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है और उनके सामने सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने की चुनौती है। कार्लसन के मुताबिक, नेतन्याहू को इजरायली संसद नेसेट में 61 सीटों का समर्थन हासिल करना होगा।

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इसके लिए उन्हें दूसरी पार्टियों के साथ राजनीतिक समझौते की जरूरत पड़ सकती है। उनका दावा है कि सत्ता गंवाने की स्थिति में नेतन्याहू को जांच और कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में वह ट्रंप के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं और ईरान के खिलाफ युद्ध को आगे बढ़ाने में उनकी दिलचस्पी हो सकती है।

अमेरिकी प्रशासन के बड़े अधिकारियों पर भी दबाव?

कार्लसन ने दावा किया है कि नेतन्याहू अमेरिकी प्रशासन के कई प्रभावशाली अधिकारियों पर भी दबाव बना रहे हैं। इनमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख ब्रैड कूपर का नाम शामिल है। उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ का भी जिक्र किया है। कार्लसन के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के कुछ प्रभावशाली लोग ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान के पक्ष में हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इजरायल ने पूरी की सैन्य तैयारियां

इस बीच, इजरायली अखबार ‘येदियोत अहरोनोत’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के साथ संभावित नए सैन्य टकराव के लिए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक तैयारियां पूरी कर ली हैं। रिपोर्ट में अज्ञात राजनीतिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने के विकल्प पेश किए हैं। इस बैठक में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन भी मौजूद थे। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने का अंतिम फैसला नहीं लिया है। बताया जा रहा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं।

परमाणु हमले से तीसरे विश्व युद्ध का खतरा!

टकर कार्लसन ने अपने बयान में भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों का जिक्र करते हुए परमाणु युद्ध के संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल करता है, तो इससे दुनिया में एक खतरनाक मिसाल कायम हो सकती है। कार्लसन के मुताबिक, रूस भी इस घटनाक्रम को अपने लिए यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की छूट के रूप में देख सकता है।

इसके अलावा भारत-पाकिस्तान और उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया के बीच भी परमाणु तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल शुरू हुआ, तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, ये टकर कार्लसन की आशंकाएं और दावे हैं, कोई पुष्ट सैन्य आकलन नहीं।

सात नवंबर तक ट्रंप ले सकते हैं फैसला?

कार्लसन ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप सात नवंबर तक यह फैसला ले सकते हैं कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाए या नहीं। उनके मुताबिक, ट्रंप फिलहाल इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहते और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तथा अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की राय भी सुन रहे हैं।

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