- ग्राम पंचायत अधिकारी ओम प्रकाश सिंह सस्पेंड
- जांच के लिए परतावल के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) नामित
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज के पनियरा ब्लॉक की आठ ग्राम पंचायतों में बिना भौतिक सत्यापन 70 लाख 40 हजार 868 रुपये का भुगतान करने के आरोप में ग्राम पंचायत अधिकारी ओम प्रकाश सिंह को निलंबित किया गया है। मामले की जांच के लिए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) परतावल को नामित किया गया है।
Maharajganj: महराजगंज जनपद में सरकारी धन के भुगतान में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद पंचायत विभाग में हड़कंप मच गया है। पनियरा विकास खंड की आठ ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर 70 लाख 40 हजार 868 रुपये का भुगतान बिना भौतिक सत्यापन कराए किए जाने के आरोप में ग्राम पंचायत अधिकारी ओम प्रकाश सिंह को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) से कार्यों का सत्यापन कराए बिना ही 15 वें और पंचम वित्त आयोग की धनराशि से भुगतान कर दिया।
यह मामला महराजगंज जिले के पनियरा विकास खंड का है। जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा की ओर से जारी निलंबन आदेश के मुताबिक, ग्राम पंचायत अधिकारी ओम प्रकाश सिंह पर आठ ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के भुगतान के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप है। इन ग्राम पंचायतों में सोहास, ऋषपुर, धनघटी, खजुरिया, तेंदुहिया, सुभितपुर, मोहद्दीनपुर और कनैला शामिल हैं। आरोप है कि इन पंचायतों में 15 वें और पंचम वित्त आयोग की धनराशि से कराए गए विकास कार्यों के लिए कुल 70,40,868 रुपये का भुगतान सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के भौतिक सत्यापन के बिना ही कर दिया गया।
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ग्राम पंचायत अधिकारी पर लगे आरोप केवल भुगतान में अनियमितता तक सीमित नहीं हैं। निलंबन आदेश में कहा गया है कि शासनादेशों और जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत ग्राम पंचायतों में कुछ जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी जानी थी। इनमें डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत सचिवालय, सामुदायिक शौचालय के बचे हुए कार्य और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े काम शामिल हैं मामले को गंभीर मानते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा ने ग्राम पंचायत अधिकारी ओम प्रकाश सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।
प्रकरण की जांच के लिए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) परतावल को नामित किया गया है। इसके साथ ही संबंधित आठों ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच अधिकारी को मौके पर जाकर यह पता लगाना होगा कि जिन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया वे वास्तव में कितने पूरे हुए हैं और उनकी स्थिति क्या है। इस मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि 70.40 लाख रुपये की धनराशि से जिन कार्यों को कराया जाना बताया गया है, वे जमीन पर कितने हुए हैं।
उनकी गुणवत्ता कैसी है और भुगतान की प्रक्रिया में किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई? स्थलीय सत्यापन के बाद इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है। जिला पंचायत राज अधिकारी के मुताबिक, शासनादेशों के विपरीत काम कराने और उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता, शासनादेशों की अवहेलना और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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