
New Delhi: अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि अंकिता के माता-पिता को तड़के चार बजे उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे दिल्ली के इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे। राहुल गांधी ने इस कार्रवाई को पीड़ित परिवार की आवाज दबाने की कोशिश बताया और मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त नहीं किए जाने की मांग का जिक्र किया।
दुष्यंत गौतम
राहुल गांधी ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता किसी तरह का हंगामा नहीं कर रहे थे, बल्कि वे अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्वक बैठे थे। उनके मुताबिक, परिवार की मांग थी कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल का पद न सौंपा जाए।
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राहुल गांधी ने हिरासत की कार्रवाई पर जताई नाराजगी
राहुल गांधी ने अपने बयान में हिरासत की कथित कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेता ने इसे एक ऐसे परिवार के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार बताया, जो अपनी बेटी से जुड़े मामले में जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता से मिले थे। राहुल गांधी के अनुसार, मुलाकात के दौरान परिवार की चिंताओं और उनकी मांगों को समझने का अवसर मिला।
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CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की मांग
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग को लेकर परिवार की ओर से उठाए गए मुद्दों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जांच का परिणाम सामने आने से पहले ही नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से रख रहा था, तो उसके सदस्यों को हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
उनके बयान का प्रमुख मुद्दा यह रहा कि किसी संवेदनशील मामले में जांच पूरी होने तक संबंधित नियुक्ति को लेकर उठ रही चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति और मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर आधिकारिक स्थिति को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है।
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पीड़ित परिवार की आवाज और जवाबदेही का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया में आरोप लगाया कि सरकार सवाल उठाने वाले लोगों की आवाज दबाने और विरोध करने वालों को हटाने का प्रयास करती है। उन्होंने अंकिता के माता-पिता के प्रति समर्थन जताते हुए न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंकिता भंडारी मामला पहले भी न्याय की मांग और जांच से जुड़े सवालों के कारण चर्चा में रहा है। इस प्रकरण में परिवार की मांगों, प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित नियुक्ति के मुद्दे पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
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