
New Delhi: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के बीच लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले होने वाली चर्चाओं में इस टैक्स को हटाने से जुड़े सुझावों पर विचार करने की बात कही है। उनके इस बयान के बाद निवेशकों की उम्मीदें बढ़ीं और शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। हालांकि, सरकार ने फिलहाल LTCG टैक्स खत्म करने का कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया है।
वित्त मंत्री ने न्यू इकोनॉमी फोरम में निवेशकों की ओर से LTCG और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों का उल्लेख किया। निवेशकों का कहना है कि शेयर खरीदने और बेचने पर लगने वाले शुल्क के अलावा मुनाफे पर टैक्स उनकी वास्तविक कमाई को प्रभावित करता है। ऐसे में टैक्स व्यवस्था की समीक्षा से बाजार में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या होता है LTCG टैक्स?
जब कोई निवेशक शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रखने के बाद बेचता है और उसे मुनाफा होता है, तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स कहा जाता है। सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंड के मामले में आम तौर पर 12 महीने से अधिक की होल्डिंग को दीर्घकालिक निवेश माना जाता है।
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मौजूदा व्यवस्था के तहत पात्र इक्विटी निवेश से एक वित्त वर्ष में होने वाले कुल दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के 1.25 लाख रुपये तक के हिस्से पर छूट मिलती है। इस सीमा से अधिक लाभ पर सामान्यतः 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स लागू होता है। अंतिम देनदारी निवेश के प्रकार और लागू कर नियमों पर निर्भर करती है।
टैक्स हटने पर निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?
यदि भविष्य में सरकार LTCG टैक्स को पूरी तरह खत्म करती है या इसकी दर में कटौती करती है, तो पात्र निवेशकों के हाथ में मुनाफे का अधिक हिस्सा बच सकता है। इससे लंबी अवधि के निवेश की आकर्षकता बढ़ने और कुछ निवेशकों का बाजार में भरोसा मजबूत होने की संभावना है।
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हालांकि, इसका वास्तविक लाभ निवेश की रकम, कमाए गए मुनाफे और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। टैक्स हटने का मतलब यह भी नहीं होगा कि शेयर बाजार में जोखिम खत्म हो जाएगा। शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और निवेश में नुकसान की संभावना बनी रहेगी।
सरकार के लिए टैक्स हटाना क्यों मुश्किल है?
LTCG टैक्स सरकार के राजस्व का एक स्रोत है। इसे खत्म करने से सरकारी खजाने पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को निवेश बढ़ाने की संभावित जरूरत और राजस्व बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना होगा।
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