
हेडिंग: एआईजी जेल प्रशासन की मनमानी और वसूली पर लगेगा अंकुश!
क्रॉसर: मोटी रकम लेकर कमाऊ जेलों पर भेजे जा रहे अधिकारी और कर्मी
क्रॉसर: विशेष ड्यूटी लगाने से पूर्व जेलमंत्री को देना होगा ब्यौरा
राकेश निडर
Lucknow : प्रदेश के कारागार विभाग में अधिकारियों और कर्मियों से मोटी रकम लेकर विशेष ड्यूटी लगाने वाले एआईजी जेल प्रशासन की मनमानी और वसूली पर अंकुश लगेगा। यह बात प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने एक खास बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि इस बात की लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि एआईजी जेल प्रशासन मोटी रकम लेकर अधिकारियों की मनमाने तरीके से कमाऊ जेलों पर विशेष ड्यूटी लगा रहे है। एआईजी प्रशासन की इस मनमानी पर अंकुश लगाया जाएगा।
कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि एआईजी जेल प्रशासन से अभी तक विभाग में अधिकारियों और जेल सुरक्षाकर्मियों की लगाई गई विशेष ड्यूटियों का ब्यौरा तलब किया जाएगा। इसके साथ ही अब विशेष ड्यूटी लगाने से पहले उन अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की सूची भेजनी होगी जिनकी ड्यूटी लगनी होगी। संस्तुति के बाद ही किसी अधिकारी और कर्मी की विशेष ड्यूटी लगाई जाएगी।
दशहरा, दीपावली और छठ पर नेपाल के 17 सीमा नाकों पर बढ़ी चौकसी
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों कारागार मुख्यालय के एआईजी हे प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने वर्ष 2023 में कानपुर नगर जेल से एक बंदी की फरारी के मामले में निलंबित हुए जेलर मनीष कुमार को बहाल होने के बाद पुनः कानपुर नगर जेल पर वापस कर दिया। कुछ दिन पहले अधीक्षक की शिकायत पर जेलर मनीष कुमार की पहले बुलंदशहर फिर मऊ जेल पर ड्यूटी लगा दी गई। करीब डेढ़ माह मऊ जेल पर रहने के बाद एक बार फिर उन्होंने धनबल पर अपनी ड्यूटी मऊ से मेरठ जेल पर लगवा ली। एक साल पहले मेरठ जेल पर तैनात हुए जेलर को बगैर किसी शिकायत के मऊ जेल भेज दिया गया। इसी प्रकार जौनपुर जेल पर तैनात जेलर अजय राय, एटा जेल पर तैनात जेलर प्रदीप कश्यप को विभिन्न जेलों पर ड्यूटी लगाने के बाद उन्हीं जेलों पर वापसी कर दी गई है। इसके अलावा कासगंज जेलर को भी कमाऊ जेल पर भेज दिया गया है।
विशेष ड्यूटी लगाएं जाने का कोई प्रावधान ही नहीं!
प्रदेश के नए जेल मैनुअल में विशेष ड्यूटी लगाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद भी एआईजी जेल प्रशासन वसूली कर लगातार अधिकारियों की ड्यूटी लगा रहे है। सूत्रों का कहना है कि विशेष ड्यूटी दो या तीन माह के लिए लगाई जाती है। प्रत्येक माह में पेशगी पहुंचाने वाले अधिकारियों को निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद भी वापस नहीं किया जाता है जबकि पेशगी नहीं देने वाले अधिकारियों को वापस कर दिया जाता है। कानपुर नगर और जौनपुर जेल इसका जीता जागता उदाहरण है। मोटी रकम देने वालों को कमाऊ जेल पर पहुंचाने के लिए कई कई बार ड्यूटी बदल भी दी जाती है। इस संबंध में कई प्रयासों के बाद भी एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात नहीं हो पाई।
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