उत्तर भारत में सावन आधा बीतने पर दक्षिण भारत में क्यों शुरू होता है श्रावण मास?

Shravan month 2026

Shravan month 2026 : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। हालांकि एक बात अक्सर लोगों को हैरान करती है कि जब उत्तर भारत में सावन का महीना आधा गुजर चुका होता है, तब दक्षिण भारत में इसकी शुरुआत होती है। पहली नजर में यह भ्रम जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सनातन परंपरा और वैदिक पंचांग की अलग-अलग गणना प्रणाली जिम्मेदार है।

दरअसल, उत्तर और दक्षिण भारत में अलग-अलग चंद्र पंचांग का पालन किया जाता है। इसी वजह से श्रावण मास की शुरुआत दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग तिथियों पर होती है। यह किसी प्रकार की त्रुटि नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

ये भी पढें

सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

दो अलग-अलग पंचांग प्रणालियों का अंतर

उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है। इस प्रणाली में किसी भी महीने की शुरुआत पूर्णिमा के अगले दिन से मानी जाती है और अगली पूर्णिमा तक वह महीना चलता है। इसी कारण उत्तर भारत में श्रावण मास की शुरुआत अपेक्षाकृत पहले हो जाती है।

वहीं, दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में अमांत पंचांग प्रचलित है। इसमें महीने की शुरुआत अमावस्या के अगले दिन से मानी जाती है और अगली अमावस्या तक वही महीना चलता है। यही वजह है कि दक्षिण भारत में श्रावण मास उत्तर भारत की तुलना में लगभग 15 दिन बाद शुरू होता है।

blog img2 687e0494b2387498d719fb4b 86033628

2026 में कब शुरू होगा सावन?

उत्तर भारत में सावन

  • शुरुआत: 30 जुलाई 2026
  • समापन: 28 अगस्त 2026

दक्षिण भारत में सावन

  • शुरुआत: 13 अगस्त 2026
  • समापन: 11 सितंबर 2026 

ये भी पढें

रोनाल्डो-जॉर्जिना की शादी की खबरों ने बढ़ाई उत्सुकता, आठ अगस्त की तारीख पर सबकी नजर

इस तरह देखा जाए तो जब उत्तर भारत में सावन अपने मध्य चरण में पहुंच जाता है, उसी समय दक्षिण भारत में इस पवित्र महीने की शुरुआत होती है।

क्या दोनों में धार्मिक महत्व अलग है?

धार्मिक दृष्टि से इसका उत्तर है—नहीं। दोनों क्षेत्रों में भगवान शिव की आराधना समान श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है। फर्क केवल पंचांग की गणना का है। चंद्रमा की गति और तिथियां समान रहती हैं, लेकिन महीने की शुरुआत तय करने का तरीका अलग होने के कारण तिथियों में अंतर दिखाई देता है। वैदिक परंपराओं में दोनों पंचांग प्रणालियों को मान्यता प्राप्त है और दोनों का अपना धार्मिक महत्व है। इसलिए उत्तर और दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला श्रावण मास समान रूप से शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

ये भी पढें

सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

एक ही दिन में गिरे 14 विकेट, पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच कांटे की टक्कर

‘गजनी’ के खतरनाक विलेन प्रदीप रावत का निधन, मुंबई में होगा अंतिम संस्कार

3 thoughts on “उत्तर भारत में सावन आधा बीतने पर दक्षिण भारत में क्यों शुरू होता है श्रावण मास?”

Comments are closed.

International

‘इबेरो-अमेरिकी सम्मेलन’ में ऑब्जर्वर देश के रूप में शामिल हुआ भारत

शाश्वत तिवारी Madrid: भारत की वैश्विक कूटनीति और ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ संबंधों को एक नई दिशा देते हुए विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा का तीन दिवसीय संपन्न हो गया। इस आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत ने लैटिन अमेरिका, यूरोप और कैरेबियन देशों के साथ अपने सहयोग का दायरा बढ़ाने में महत्वपूर्ण सफलता […]

Read More
International

नेपाल सरकार ने मनोज केसी को नए  IGP पद पर किया नियुक्त

दान बहादुर कार्की को बनाया गया प्रधानमंत्री बालेन शाह का विशेष सुरक्षा सलाहकार उमेश चन्द्र त्रिपाठी Kathmandu: नेपाल सरकार ने मनोज केसी को नेपाल पुलिस का नया महानिरीक्षक नियुक्त किया है। इससे पहले IGP रहे दानबहादुर कार्की को प्रधानमंत्री का विशेष सुरक्षा सलाहकार बनाया गया है। करीब 28 वर्षों के पुलिस सेवा अनुभव के दौरान […]

Read More
Religion Uttar Pradesh

मनुस्मृति में संशोधन नहीं, शास्त्रों में मिलावट का पर्दाफाश करना उद्देश्य: स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती

Varanasi: संस्कृति संसद में भारतीय धर्मशास्त्रों, मनुस्मृति और सनातन परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श करते हुए स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मनुस्मृति में संशोधन करना नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रों में कथित रूप से किए गए प्रक्षेप, मूल ग्रंथों में मिलावट और विदेशों में पहुंचाई गई दुर्लभ पांडुलिपियों की वास्तविकता […]

Read More