सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की घबराहट: आर्थिक तबाही की आशंका जताकर दुनिया से लगाई गुहार

Indus Waters Treaty Dispute

Indus Waters Treaty Dispute :  सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख से पाकिस्तान में राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की। सेमिनार में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार, PPP नेता बिलावल भुट्टो और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने भारत का नाम लिए बिना कड़े बयान दिए। इशाक डार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि को एकतरफा रूप से रद्द करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि किसी भी संधि के तहत जिम्मेदारियों को बिना सहमति खत्म नहीं किया जा सकता और पानी को राजनीतिक हथियार बनाना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक है। डार ने यह भी चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान को उसके हिस्से का पानी रोकने या कम करने की कोशिश की गई, तो इसे गंभीर परिणामों वाली कार्रवाई माना जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जल संसाधनों पर किसी भी तरह की रोक क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती है।

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वहीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता सदियों से इन नदियों पर निर्भर रही है और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल को हथियार बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। पाकिस्तानी मंत्री मुसादिक मलिक ने इस मुद्दे को और व्यापक रूप देते हुए कहा कि सिंधु जल संधि केवल दो देशों के बीच समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रतीक है।

उनके अनुसार, यदि यह समझौता टूटता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य संधियों पर भी सवाल उठेंगे। उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था की परीक्षा करार दिया। दूसरी ओर, भारत की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संकेत दिया था कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई न होने तक सिंधु जल संधि पर भारत का रुख सख्त बना रहेगा। गौरतलब है कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी का बंटवारा तय किया गया था। यह समझौता कई युद्धों और तनावों के बावजूद दशकों तक कायम रहा, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ते तनाव और सीमा पार घटनाओं के बाद इसमें दरारें गहराती नजर आ रही

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