कच्चा तेल सस्ता, फिर भी LPG-CNG के दाम क्यों नहीं घटते? जानिए बड़ी वजह

Petrol and diesel prices

Petrol and diesel prices : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के महीनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल, LPG और  CNG  की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो गया है, तो ईंधन के दाम अब भी ऊंचे क्यों बने हुए हैं। दरअसल, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल की लागत से तय नहीं होती। इसमें रिफाइनिंग का खर्च, परिवहन, तेल कंपनियों का मार्जिन, डीलर कमीशन और सबसे बड़ा हिस्सा केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स का होता है। यही वजह है कि क्रूड सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत कमी नहीं दिखाई देती।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रोसेस करने के बाद पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कई तरह की लागत जुड़ती है। इसके बाद तेल विपणन कंपनियां और डीलर अपना मार्जिन जोड़ते हैं, जबकि केंद्र और राज्य सरकारें एक्साइज ड्यूटी तथा वैट जैसे टैक्स वसूलती हैं। कई राज्यों में पेट्रोल की खुदरा कीमत का लगभग आधा हिस्सा टैक्स के रूप में शामिल होता है। डीजल की कीमत पेट्रोल से कुछ कम रहती है क्योंकि इस पर टैक्स अपेक्षाकृत कम लगाया जाता है। डीजल का उपयोग परिवहन, कृषि और आवश्यक सेवाओं में अधिक होता है, इसलिए सरकारें इसकी कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करती हैं।

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LPG की कीमत का निर्धारण भी अलग तरीके से होता है। यह केवल क्रूड ऑयल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय LPG बाजार, आयात लागत, परिवहन, सिलेंडर भराई, डीलर कमीशन और सरकारी सब्सिडी जैसे कारकों से प्रभावित होती है। इसी कारण क्रूड सस्ता होने पर भी एलपीजी की कीमतों में तुरंत राहत नहीं मिलती। वहीं, CNG  प्राकृतिक गैस से तैयार की जाती है, इसलिए इसकी कीमत कच्चे तेल के बजाय प्राकृतिक गैस की वैश्विक और घरेलू कीमतों पर निर्भर करती है। हालांकि, सरकार इसे अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन मानते हुए टैक्स कम रखती है, जिससे यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ती रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कंपनियां पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल का स्टॉक खत्म होने के बाद ही नई कीमतों का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और सरकार की टैक्स नीति भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित करती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम बनी रहती हैं और सरकार टैक्स में राहत देती है, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, एलपीजी और CNG की कीमतों में बदलाव उनके अलग मूल्य निर्धारण तंत्र के कारण धीरे-धीरे ही संभव होगा।

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