
Ketan Agarwal case : कुंडली के 36 में से 27 गुण मिलने के बाद जिस रिश्ते को दोनों परिवारों ने आदर्श विवाह मानकर मंजूरी दी थी, वही रिश्ता अब देश के सबसे चर्चित हत्या मामलों में शामिल हो गया है। केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस का आरोप है कि मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित मित्र चेतन चौधरी ने मिलकर हत्या की साजिश रची। हालांकि, दोनों आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। पुलिस जांच के अनुसार, जनवरी 2026 में रिश्ता तय करने से पहले दोनों परिवारों ने पारंपरिक रीति से कुंडली मिलवाई थी। परिवार के ज्योतिषी ने बताया था कि दोनों की कुंडलियों में 36 में से 27 गुण मिले हैं, जो विवाह के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
27 गुणों वाला रिश्ता कैसे बना मर्डर केस?
ज्योतिषीय गणना में केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ बताया गया तथा विवाह को सफल और शुभ बताया गया। इसके बाद परिवारों ने रिश्ते को अंतिम रूप दिया। फरवरी 2026 में पुणे के एक होटल में दोनों की सगाई हुई और नवंबर 2026 में विवाह की तैयारी शुरू कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती कुछ सप्ताह तक सब सामान्य रहा, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने लगीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी दौरान सिया और चेतन चौधरी के बीच संपर्क फिर बढ़ा और कथित तौर पर हत्या की साजिश तैयार की गई। हालांकि, इन दावों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।
परिवार के बयानों से बढ़ा सिया पर शक
जांच में सिया के भाई साहिल गोयल के बयान भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, साहिल ने बताया कि उसे सिया और चेतन की दोस्ती की जानकारी थी, लेकिन सगाई के बाद सिया ने परिवार से कहा था कि उसका चेतन से कोई संपर्क नहीं है। वहीं, केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि सगाई के बाद उनके बेटे ने कई बार सिया के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी। पुलिस के मुताबिक, केतन ने परिवार से कहा था कि कई बार फोन करने पर सिया का मोबाइल व्यस्त मिलता था और बातचीत के दौरान वह अक्सर चेतन का जिक्र करती थी, जिससे उसे संदेह होने लगा था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि छह जून को प्रस्तावित बाली प्री-वेडिंग ट्रिप रद्द होने के बाद केतन ने अपने परिवार से रिश्ते में बढ़ते तनाव की बात कही थी। जांच एजेंसी का दावा है कि 14 जून को लोहागढ़ किले की यात्रा के दौरान भी एक ऐसी घटना हुई थी, जिसमें केतन खाई में गिरते-गिरते बच गया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
फॉरेंसिक जांच से खुलेंगे मौत के राज
18 जून को लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन अग्रवाल की मौत हो गई। पुलिस का आरोप है कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हत्या थी। इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल दोनों न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं और मामले की जांच जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब जांच का फोकस डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर है। घटनास्थल पर कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला और वहां सीसीटीवी कैमरे भी नहीं थे। ऐसे में जांच एजेंसियां मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा, कथित डिलीट किए गए मैसेज, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, क्राइम सीन रीक्रिएशन और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही हैं।
जांच टीम सिया गोयल का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए अदालत से अनुमति ली जा सकती है। हालांकि, भारतीय कानून के अनुसार पॉलीग्राफ टेस्ट केवल संबंधित व्यक्ति की सहमति और अदालत की अनुमति से ही कराया जा सकता है तथा इसकी रिपोर्ट अपने आप में अंतिम साक्ष्य नहीं मानी जाती। केतन अग्रवाल मौत मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या पुलिस के पास हत्या के आरोपों को अदालत में सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य हैं।
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