
Karnataka BJP Cross Voting : कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। चुनाव में कथित क्रॉस-वोटिंग के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली तलब किया है। पार्टी नेतृत्व इस घटनाक्रम को संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद गंभीर मान रहा है।
दरअसल, कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा। चुनाव परिणामों ने तब और अधिक चर्चा बटोरी जब यह सामने आया कि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) यानी जद(एस) के कुछ विधायकों ने कथित तौर पर क्रॉस-वोटिंग की, जिससे कांग्रेस को अपेक्षा से कहीं अधिक वोट मिले। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को कुल 151 वोट प्राप्त हुए, जबकि उसके पास अनुमानित रूप से लगभग 140 वोट ही होने चाहिए थे।
इसका मतलब है कि उसे 11 अतिरिक्त वोट मिले। शुरुआती आकलन में दावा किया जा रहा है कि भाजपा के तीन और जद(एस) के आठ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। इसके अलावा भाजपा के एक विधायक का वोट अमान्य भी घोषित कर दिया गया, जिससे पार्टी को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ा। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश नेतृत्व से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने बी.वाई. विजयेंद्र, पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और अन्य वरिष्ठ नेताओं को 23 जून को दिल्ली में बैठक के लिए बुलाया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्रॉस-वोटिंग के कारणों, जिम्मेदार नेताओं और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।
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भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी स्वीकार किया कि पार्टी के कुछ विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है। उन्होंने कहा कि पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अशोक ने स्पष्ट संकेत दिए कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि पार्टी पूरे मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि किसने क्रॉस-वोटिंग की और इसके पीछे क्या कारण थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद पार्टी उचित निर्णय लेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी झटका नहीं बल्कि संगठनात्मक चुनौती भी है। यदि क्रॉस-वोटिंग के आरोप सही साबित होते हैं तो यह राज्य इकाई में मौजूद अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी की ओर संकेत करेगा। दूसरी ओर कांग्रेस इस जीत को अपनी राजनीतिक मजबूती और सरकार बनने के बाद जनता तथा जनप्रतिनिधियों के बढ़ते समर्थन के रूप में पेश कर रही है। फिलहाल सभी की नजरें 23 जून को दिल्ली में होने वाली भाजपा नेतृत्व की बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि पार्टी क्रॉस-वोटिंग के दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाती है और कर्नाटक में अपनी संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
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