
Suicide of 11 students : परीक्षा संबंधी विवादों और कथित पेपर लीक मामलों के बीच छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं को लेकर युवाओं के संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं और तनाव के कारण अपनी जान गंवाई है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग भी दोहराई है।
यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जब 20 जून को जंतर-मंतर पर CJP द्वारा दूसरा बड़ा विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। संगठन का कहना है कि वह शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक की घटनाओं और जवाबदेही की कमी के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करेगा। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में अभिजीत दिपके ने कहा कि देश के युवा छात्रों का भविष्य और उनकी मानसिक सेहत गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल के सप्ताहों में 11 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से पांच छात्रों की मौत पिछले 48 घंटों के भीतर हुई। दिपके के अनुसार, परीक्षा दोबारा होने की संभावनाओं और परिणामों को लेकर बनी अनिश्चितता ने छात्रों पर भारी मानसिक दबाव पैदा कर दिया है।
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उन्होंने पत्र में लिखा कि हजारों परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने और उनके सपनों को पूरा करने के लिए भारी शिक्षा ऋण लिया है। ऐसे में जब कोई छात्र अपनी जान गंवा देता है तो परिवार केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह टूट जाता है। इसी कारण उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रभावित परिवारों को तत्काल 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। दिपके ने कहा कि यह केवल आर्थिक मदद का मुद्दा नहीं है, बल्कि उन परिवारों के प्रति सरकार की नैतिक जिम्मेदारी भी है, जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन में कथित विफलताओं को इस संकट का प्रमुख कारण बताया।
CJP के संस्थापक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग दोहराते हुए कहा कि उनका संगठन पिछले एक महीने से देशभर में इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहा है। उनका कहना है कि छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी मांग जवाबदेही तय करना है। यदि इतने गंभीर मामलों के बावजूद कोई जिम्मेदारी तय नहीं होती, तो इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासन मौजूदा व्यवस्था को स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। दिपके के अनुसार, लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा तभी लौट सकता है जब सरकार इस मामले में ठोस कदम उठाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। अब 20 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां CJP शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और छात्रों के हितों की रक्षा को लेकर अपनी मांगों को और मुखरता से उठाने की तैयारी में है।
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