
राजेश श्रीवास्तव
ED वेदांता समूह के दिल्ली और राजस्थान परिसरों में ED ने फ़ेमा उल्लंघन में छापे मारे हैं। कंपनी के प्रमोटर अनिल अग्रवाल ने अप्रैल में अडानी समूह के खिलाफ शिकायत की थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में है। तो कहीं ऐसा तो नहीं कि अडानी के विरोध के चलने का खामियाजा वेदांता समूह को उठाना पड़ रहा है। अडानी की कंपनी को काम वेदांता से अधिक दाम कोड करने के बावजूद कुछ काम भी दिये गये, जिसका वेदांता खुलकर विरोध कर रहा है।
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जानकारी के अनुसार अनिल अग्रवाल और गौतम अडानी के बीच बड़ा कॉरपोरेट विवाद भी चल रहा है। मार्च 2026 के अंत में, अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर यह दावा किया था कि वेदांता को दिवालिया हो चुकी कंपनी ‘जयप्रकाश एसोसिएट्स’ की संपत्तियों को खरीदने के लिए लिखित पुष्टि मिल चुकी थी। वेदांता ने इस बिड (बोली) को जीत लिया था। हालांकि, बाद में इस फैसले को कथित तौर पर पलट दिया गया और यह डील अडानी समूह के पक्ष में चली गई। इस फैसले से असंतुष्ट होकर वेदांता समूह ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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वेदांता ने करीब क्त4 बिलियन (लगभग 14,500 से 16,000 करोड़) मूल्य की इन संपत्तियों के लिए अडानी समूह की समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग की है। वेदांता का आरोप है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के लेनदारों ने प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती। कंपनी का दावा है कि नेट प्रेजेंट वैल्यू के आधार पर वेदांता की 12,505.85 करोड़ की बोली सबसे ऊंची थी, जबकि अडानी समूह की कुल बोली मूल्य के हिसाब से कम थी। इसके बावजूद बैंकों और कर्जदाताओं की समिति ने अडानी की योजना को मंजूरी दे दी क्योंकि अडानी समूह ने तत्काल नकद भुगतान और तेजी से भुगतान की बात कही थी। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे देश के दो सबसे बड़े कॉरपोरेट घरानों के बीच का विवाद और गहरा गया है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिग्गज कंपनी ‘वेदांता समूह’ के खिलाफ मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। ED के अधिकारियों के अनुसार, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत संदिग्ध विदेशी मुद्रा उल्लंघनों और सीमा पार वित्तीय लेन-देन की जांच के सिलसिले में वेदांता समूह से जुड़े विभिन्न परिसरों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया गया। यह तलाशी अभियान दिल्ली, राजस्थान और कई अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थित कंपनी के परिसरों में चलाया गया।
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ईडी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई फ़ेमा के दीवानी प्रावधानों के तहत कथित उल्लंघन को लेकर शुरू की गई है, जिसमें फंड ट्रांसफर और विदेशी लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ियां शामिल हैं। ED की इस कार्रवाई पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए वेदांता समूह के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। प्रवक्ता ने कहा, ”कंपनी अधिकारियों को पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है और मांगी जा रही सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रही है।
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3 thoughts on “वेदांता को कही अडानी का विरोध महंगा तो नहीं पड़ गया!”
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