
नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाली एयरलाइंस अब ज़मीन पर आने की कगार पर हैं। लगातार बढ़ती तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने एयरलाइंस कंपनियों की कमर तोड़ दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक आपातकालीन पत्र लिखकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
संकट की जड़: आसमान छूती ईंधन की कीमतें
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन, जिसे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) कहा जाता है, की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च संचालन लागत में ईंधन का हिस्सा जो पहले 30-40% हुआ करता था, वह अब बढ़कर 55-60% तक पहुंच गया है। ईरान-इजरायल संघर्ष और अमेरिका के साथ जारी तनातनी ने कच्चे तेल के बाजार में आग लगा दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देशों से आने वाले तेल टैंकरों के लिए यह मुख्य मार्ग है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर पैदा की गई बाधाओं ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत में तेल की कीमतों पर पड़ा है।
कंपनियों का अस्तित्व दांव पर
FIA, जिसमें एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, ने स्पष्ट किया है कि यह केवल मुनाफे में कमी का मामला नहीं है, बल्कि यह कंपनियों के अस्तित्व (Survival) की लड़ाई है।
रूटों की कटौती: कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट घाटे के कारण बंद होने की कगार पर हैं।
कैश फ्लो पर दबाव: ईंधन पर अत्यधिक खर्च के कारण कंपनियों के पास दैनिक परिचालन के लिए नकदी की कमी हो रही है।
किरायों में बढ़ोतरी: अगर सरकार ने राहत नहीं दी, तो कंपनियों के पास हवाई किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा, जिससे आम यात्री पर सीधा बोझ पड़ेगा।
FIA की सरकार से प्रमुख मांगें
एविएशन संगठनों ने सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कुछ ठोस मांगें रखी हैं।
‘क्रैक बैंड’ प्राइसिंग मेकेनिज्म की वापसी: पुराने मूल्य निर्धारण तंत्र को फिर से लागू करने की मांग की गई है, ताकि कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव का सीधा और अचानक असर ATF पर न पड़े।
टैक्स में कटौती: भारत में विमानन ईंधन पर लगने वाला टैक्स दुनिया के कई देशों के मुकाबले काफी अधिक है। FIA ने इसे तर्कसंगत बनाने की अपील की है।
मूल्य स्थिरता: कंपनियों का कहना है कि कीमतों में स्थिरता होने पर ही वे लंबी अवधि की रूट प्लानिंग और किराया निर्धारण कर सकेंगी।
यात्रियों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
विमानन क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यदि यह सेक्टर संकट में आता है, तो इसके परिणाम दूरगामी होंगे।
महंगा सफर: यात्रियों को टिकट के लिए दोगुनी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
कनेक्टिविटी में कमी: छोटे शहरों के लिए उड़ानें कम हो सकती हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास प्रभावित होगा।
आर्थिक मंदी: पर्यटन और व्यापारिक यात्राएं कम होने से देश की जीडीपी पर असर पड़ सकता है।
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