आगरा जेल अधीक्षक पर कार्रवाई से डर रहे प्रमुख सचिव कारागार!

  •  जेल मुख्यालय, परिक्षेत्र डीआईजी से सेटिंग गेटिंग का खेल
  • मुख्यमंत्री समेत अन्य आला अफसरों से शिकायत पर भी नहीं हुई कार्रवाई
  • सुल्तानपुर के बाद आगरा जेल में हुई आत्महत्या मामले में अफसरों ने साध रखी चुप्पी

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। शासन और कारागार मुख्यालय के साथ परिक्षेत्र के DIG जेल से मजबूत सेटिंग रखने वाले आगरा जेल अधीक्षक पर कार्रवाई करने से प्रमुख सचिव कारागार डर रहे है। यही वजह ही की दो दिन बाद रिहा होने वाले बंदी की आत्महत्या के मामले में भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक जेल में चल रही बेतहाशा वसूली की शिकायतें होने के बाद भी अधीक्षक के खिलाफ आजतक कोई कार्रवाई नहीं गई। ऐसा तब किया जा रहा जब मऊ जेल में बंदी के आत्महत्या के मामले में अधीक्षक को जेल से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। यह अलग बात है कि कुछ दिन बाद ही जुगाड और धनबल के सहारे वह पुनः मऊ जेल पहुंच गए। मेहरबान मुख्यालय के अधिकारियों ने उन्हें मऊ के साथ आजमगढ़ जेल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया। हकीकत यह है कि विभाग में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

बीते सोमवार को आगरा जिला जेल में विचाराधीन युवा बंदी मुस्तकीम उर्फ मटोर जेल अस्पताल के फार्मासिस्ट कक्ष में कंबल के किनारे लगे कपड़े की रस्सी बनाकर पंखे से फांसी लगाकर अपने जीवन लीला को समाप्त कर लिया। इसकी जानकारी होने पर जेल प्रशासन के अधिकारियों में खलबली मच गई। हरिपर्वत थाना क्षेत्र के वजीरपुरा गांव का रहने वाला बंदी मुस्तकीम वर्ष 2024 से जेल में बंद था। चोरी और चोरी का माल बरामद होने के मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एकाएक हुई बंदी की मौत का यह मामला जेलकर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि कार्रवाई नहीं होने से अधीक्षक समेत जेल प्रशासन के अधिकारी बेलगाम हो गए हैं।

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बंदायू जेल में बगैर वसूली नहीं होता बंदियों का इलाज!

सूत्रों की माने तो पश्चिम की कमाऊ जेलों में शुमार आगरा जेल में अधिकारियों ने लूट मचा रखी है। बीते दिनों जेल में हो रही बेतहाशा वसूली को लेकर हिन्दू सभा के पदाधिकारियों ने सीएम, जिला और जेल प्रशासन को शिकायत भेजकर जेल अधिकारियों की वसूली पर अंकुश लगाए जाने की मांग की। इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। महासभा का आरोप था कि जेल में प्रवेश करते ही वसूली प्रारंभ हो जाती है। नए आगंतुक बंदी से हाता, मशक्कत, बैठकी, गिनती कटवाने के नाम पर अनाप शनाप वसूली की जाती है। सूत्रों का कहना है कि क्रिप्टो करेंसी मामले के बंदी विनोद स्वामी से मशक्कत के लिए एक करोड़ रुपए की मांग की। मांग नहीं पूरी होने पर बंदी को सफाई कमान (नालियों की गंदगी साफ करने) में लगाने की धमकी भी दी गई। जेल प्रशासन की अवैध वसूली और दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से बंदी तो बंदी बंदियों के परिजन भी काफी दुखी है। उधर इस संबंध में जब आगरा जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा से बात करने का प्रयास किया तो उनका फोन नहीं उठा। मैसेज का भी जवाब देना उन्होंने मुनासिब नहीं समझा। परिक्षेत्र डीआईजी पी एन पांडेय तो इस कदर बेलगाम हो गए है कि वह फोन उठाने के बजाए मेरठ परिक्षेत्र में तैनाती कराने की सेटिंग गेटिंग में लगे हुए हैं।

तो अब जेलों में कंबल के प्रवेश पर भी लगेगी रोक!

प्रदेश कारागार मुख्यालय के आला अफसर जेलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुधारने के बजाय दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर रोक लगाने में जुटे हुए है। बीते दिनों एक जेल बंदी ने अंगौछे से फांसी लगा ली तो अधिकारियों ने जेलों में अंगौछे के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इसी प्रकार एक जेल में बंदी ने जूते के फीते से लटकर जान दे दी तो फीते वाले जूतों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। पजामे के नारे से फांसी लगी तो नारे वाले पजामे पर रोक लगा दी गई। आगरा जेल में बंदी ने कंबल के किनारे लगे कपड़े की रस्सी बनाकर फांसी लगा ली है। इस घटना के बाद जेलकर्मियों में चर्चा है कि मुख्यालय के अफसर जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के बजाए कंबल के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा सकते है। उधर विभाग के आला अफसर इस गंभीर मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।


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