गुजरात के भावनगर में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच एक ऐसा मामला सामने आया जिसने राजनीति में हलचल मचा दी। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष पर अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के अपहरण का केस दर्ज किया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। मामला तब शुरू हुआ जब कांग्रेस उम्मीदवार भरत रमेश कंबड़ के भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनका भाई 14 अप्रैल से लापता है और उसके अपहरण की आशंका है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भावनगर शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोहरसिंह गोहिल उर्फ लालभा के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
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हालांकि, जांच के दौरान ही स्थिति बदल गई। उम्मीदवार भरत रमेश ने खुद एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अपहरण नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से भावनगर छोड़कर पड़ोसी जिले अमरेली में गए हैं, ताकि किसी भी तरह के दबाव या प्रलोभन से बच सकें और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रख सकें। इसके साथ ही उन्होंने एक नोटरीकृत हलफनामा भी प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके अपहरण की खबरें पूरी तरह गलत हैं। इस बयान के बाद पुलिस ने नगर अध्यक्ष को छोड़ दिया।
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इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल चुनाव के दौरान उनके उम्मीदवारों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के मामलों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसी बीच कच्छ जिले में भी एक अन्य कांग्रेस उम्मीदवार के कथित अपहरण का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस जांच जारी है। वहीं महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं, जहां 12 मई को मतदान होना है।
