- संघर्ष से सफलता तक: सरस्वती बनीं जिले की सेकंड टॉपर, 78 प्रतिशत अंक हासिल कर रचा इतिहास
पाली/राजस्थान। कठिन आर्थिक परिस्थितियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और पढ़ाई में आए लंबे अंतराल के बावजूद 19 वर्षीय सरस्वती ने वह कर दिखाया, जो कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से आने वाली सरस्वती ने कक्षा 10वीं में 78 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले में द्वितीय स्थान हासिल किया और यह साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने परिस्थितियाँ कभी बाधा नहीं बनतीं। सरस्वती एक बड़े संयुक्त परिवार से हैं, जहाँ 25 सदस्य एक साथ रहते हैं। उनका परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर है। सीमित संसाधनों और घरेलू जिम्मेदारियों के चलते उनकी पढ़ाई कई बार प्रभावित हुई।
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उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गाँव के पास स्थित विद्यालय से कक्षा 8 तक पूरी की, जिसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें रोज़ाना लगभग 7 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। बाद में उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के आवासीय विद्यालय में कक्षा 10वीं की पढ़ाई शुरू की, लेकिन कुछ निजी कारणों से उन्हें बीच में पढ़ाई छोड़कर गाँव लौटना पड़ा, जिसके कारण वे परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं। वर्ष 2022 में, मात्र 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने पढ़ाई से दूरी बना ली। करीब दो साल तक शिक्षा से दूर रहने के बावजूद उनके मन में आगे बढ़ने की इच्छा बनी रही। इसी दौरान उन्हें गाँव में एजुकेट गर्ल्स द्वारा संचालित प्रगति कैंप की जानकारी मिली। उन्होंने अपनी बात प्रेरक दीदी धनकी देवी से साझा की, जिन्होंने उनके माता-पिता को समझाकर उन्हें दोबारा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
वर्ष 2024 में सरस्वती ने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में नामांकन कराया और नियमित रूप से प्रगति कैंप में अध्ययन शुरू किया। वे प्रतिदिन लगभग तीन घंटे कैंप में पढ़ाई करती थीं। इस दौरान उन्हें न केवल अकादमिक सहायता मिली, बल्कि जीवन कौशल और डिजिटल साक्षरता की भी जानकारी मिली, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। घर की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने खेती-बाड़ी और घरेलू कार्यों के बीच समय निकालकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब 10वीं का परिणाम घोषित हुआ। सरस्वती ने 78% अंक प्राप्त कर मीरा पुरस्कार के लिए चयनित होकर जिले में द्वितीय स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के बाद परिवार और पूरे गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई।
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उनकी सफलता से गाँव की अन्य लड़कियों को भी प्रेरणा मिली और कई ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए नामांकन कराया।सरस्वती को एजुकेट गर्ल्स के मुंबई में आयोजित 18वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने का अवसर भी मिला, लेकिन पारिवारिक कारणों से वे वहाँ नहीं जा सकीं। हालांकि, पाली में आयोजित दीक्षांत समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। वर्तमान में सरस्वती ने कक्षा 12वीं में नामांकन कर लिया है और पूरी लगन से पढ़ाई जारी रखी है। उनका सपना है कि वे आगे चलकर शिक्षिका बनें और सरकारी नौकरी प्राप्त कर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन करें।
