भारतीय चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि आगामी विधानसभा और उपचुनावों में मतदान वाले दिन सभी कर्मचारियों को छुट्टी मिलेगी। यह नियम केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी लागू होगा। चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया कि इस छुट्टी का वेतन नहीं काटा जाएगा। मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत सभी को मतदान के दिन छुट्टी मिलना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति अपने काम के कारण मतदान से वंचित न रहे। सरकारी कर्मचारियों को पूरी छुट्टी मिलेगी, वहीं निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी पेड लीव दी जाएगी। दिहाड़ी मजदूरों के मामले में भी उन्हें पूरा वेतन सुनिश्चित किया गया है। यदि कोई कर्मचारी अपनी निर्वाचन क्षेत्र से बाहर काम कर रहा है, तब भी उसे छुट्टी मिलेगी ताकि वह अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
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चुनाव आयोग ने मतदान की तारीखें भी जारी की हैं। नौअप्रैल 2026 को असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान होगा। 23 अप्रैल को तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल (पहला चरण) में मतदान होगा, जबकि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के लिए वोटिंग होगी। इन तारीखों पर संबंधित राज्यों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर पहले चरण में मतदान होगा। केरल की 140 सीटों और पुडुचेरी की 30 सीटों पर भी इसी दिन वोटिंग होगी। तमिलनाडु की 234 और पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। साथ ही गुजरात और महाराष्ट्र में उपचुनाव भी इसी दिन होंगे। चुनाव आयोग ने सभी नियोक्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों को मतदान के दिन पेड हॉलिडे दें। ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी नागरिक अपने अधिकार का प्रयोग स्वतंत्र रूप से कर सकें।
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