- नौतनवां विधानसभा क्षेत्र को लेकर BJP को एक बार फिर पंकज चौधरी पर टिकी हैं निगाहें
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले की नौतनवां विधानसभा सीट पर साल 2022 में दो बाहुबलियों की लड़ाई में तीसरे ने बाजी मार ली। भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी ऋषि त्रिपाठी ने 40 वर्षो के मिथक को तोड़ दिया। हालांकि 1967 में जनसंघ के टिकट पर गगहा निवासी बाबू रघुराज सिंह ने दीपक चुनाव चिन्ह पर जीत दर्ज की थी। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले की नौतनवां विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी व निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी की जीत हुई। यहां भाजपा-निषाद पार्टी के गठबंधन प्रत्याशी ऋषि त्रिपाठी ने अपने निकटवर्ती समाजवादी पार्टी (सपा) प्रत्याशी कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह को 15870 वोटों से हराया था। ऋषि त्रिपाठी को 90122 मत मिले और सपा प्रत्याशी मुन्ना सिंह को 74252 मत मिले थे। वहीं नौतनवां विधानसभा से विधायक और कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में पत्नी मधुमणि समेत आजीवन कारावास की सजा काट रहे बाहुबली नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री अमर मणि त्रिपाठी के बेटे अमन मणि 45963 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
वीरेंद्र प्रताप शाही से शुरू हुआ सफर
बता दें कि अस्सी के दशक में इस विधानसभा की पहचान लक्ष्मीपुर विधानसभा के रूप में थी। तब पहली बार छात्र राजनीति से उभरे बाहुबली नेता वीरेन्द्र प्रताप शाही ने लक्ष्मीपुर से विधानसभा की सियासत में कदम रखा। उनको उस समय के युवा नेता कुंवर अखिलेश सिंह का साथ मिला। साल 1981में हुए उपचुनाव बीरेंद्र प्रताप शाही निर्दल प्रत्याशी के रूप में पहली बार लड़े और अमर मणि त्रिपाठी को शिकस्त देकर विधायक बने। उस चुनाव में अमृत पाद डांगे वाली कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस से गठबंधन के टिकट पर अमर मणि चुनाव लड़े थे। चार साल बाद 1985 के चुनाव में वीरेन्द्र प्रताप शाही को लगातार दूसरी बार निर्दल प्रत्याशी के रूप में जीत मिली। उसके बाद बीरेंद्र प्रताप शाही क्षेत्र छोड़कर चले गए। उसके बाद 1989 में अमर मणि त्रिपाठी के सामने सपा के टिकट पर युवा नेता कुंवर अखिलेश सिंह लक्ष्मीपुर से विधानसभा चुनावी मैदान में थे। इस चुनाव में अमर मणि त्रिपाठी ने कुंवर अखिलेश को हराकर पहली बार जीत का स्वाद चखा और विधायक बन गए।
अमरमणि ने लगाई थी जीत की हैट्रिक
1989 में अमरमणि त्रिपाठी पहली बार विधायक बने, लेकिन साल 1991 के चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार कुंवर अखिलेश सिंह से अमर मणि चुनाव हार गए। 1993 के चुनाव में कुंवर अखिलेश सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार दूसरी बार चुनाव जीत विधायक बने। उसके बाद लगातार तीन चुनाव 1996, 2002 व 2007 के चुनाव में अमर मणि कांग्रेस, बसपा व सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत की हैट्रिक लगाई। 2007 में अमर मणि त्रिपाठी जेल से चुनाव लड़े थे और विजयी रहे। परसीमन के बाद सोलहवीं विधानसभा में लक्ष्मीपुर विधानसभा क्षेत्र का नाम परिवर्तित कर नौतनवां कर दिया गया। बहु चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अमर मणि जेल में कैद हो गए। 23 सितंबर 2003 में हुई गिरफ्तारी के बाद 2012 में अमर मणि त्रिपाठी अपने पुत्र अमन मणि को सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन वह कुंवर अखिलेश सिंह के छोटे भाई कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह से चुनाव हार गए। उस समय कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। जीत के बाद कुंवर कौशल सिंह की आस्था सपा में हो गई क्योंकि कांग्रेस में रहते हुए 2014 में उन्होंने लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर लड़ रहे अपने बड़े भाई कुंवर अखिलेश सिंह के लिए खुले तौर पर प्रचार किया। कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह ने 2017 में सपा का दामन थाम लिया और चुनावी मैदान में उतर गए। उस समय उनके मुकाबले सारा सिंह हत्याकांड में जेल में बंद अमन मणि त्रिपाठी ने ताल ठोंक दिया। उनके चुनाव प्रचार की कमान उनकी दोनों बहनें तनुश्री और अलंकृता ने संभाली, जिसमें अमन मणि को जीत हासिल हुई।
सियासत की मंडी में फीकी पड़ी मणि की चमक
महराजगंज की नौतनवां विधानसभा उन चर्चित सीटों में से एक है, जिसपर पूरे देश की नजर बनी रहती है। इस सीट पर कभी कमल नहीं खिला और दो बाहुबलियों के बीच हार-जीत होती रही है, लेकिन 2022 के नतीजों ने इतिहास को पलट दिया और भाजपा- निषाद पार्टी के प्रत्याशी ऋषि त्रिपाठी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस सीट पर कभी मणि परिवार का दबदबा रहा है। 2017 का विधानसभा चुनाव अपनी पत्नी सारा हत्याकांड में जेल में रहते हुए अमन मणि त्रिपाठी ने चुनाव जीता था लेकिन सियासत की मंडी में जब चमक फीकी पड़ी और जनाधार खिसका तो अमन मणि तीसरे स्थान पर पहुंच गए। 2022 के चुनाव में वह बसपा के टिकट पर लड़कर तीसरे नंबर पर रहे।
काम आया केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का सोशल इंजीनियरिंग
साल 2022 के चुनाव में महराजगंज के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सबसे ज्यादा जोर नौतनवां विधानसभा पर ही लगाया था और नौतनवां में लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक सभाएं की थी, जिसका असर विधानसभा चुनाव में साफ दिखा। पहले राउंड से ही बीजेपी के ऋषि त्रिपाठी ने जो बढ़त बनाना शुरु किया वो बढ़ता ही गया और उनकी जीत हुई। 2027 के चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। एक बार फिर नौतनवां विधानसभा सीट पर बाहुबलियों की नजर है। मधुमिता हत्याकांड में सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी अब जेल से बाहर आ चुके हैं। जेल से बाहर आते ही अपने बेटे पूर्व विधायक अमन मणि त्रिपाठी को लेकर महराजगंज जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों (फरेंदा और नौतनवां) में तूफानी दौरा भी शुरू कर दिए हैं। अमर मणि त्रिपाठी दोनों विधानसभा क्षेत्रों से उम्मीदवार किसे बनाएंगे यह अभी तय नहीं है। लेकिन दबदबा कायम करने की जी-तोड़ कोशिश करने में लगे हुए हैं। अब देखना यह है कि दबदबा था दबदबा है और दबदबा रहेगा इस मुहावरे को चरितार्थ कर पाएंगे यह भविष्य के गर्भ में है।
वहीं दूसरी तरफ सपा नेता कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह ने भी अभी से विधानसभा क्षेत्र में अपनी पूरी ताकत झोंक दिया है। चुनावी बैतरड़ी पार करने के लिए उन्हें और काफी मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि की भाई से भाई का बंटवारा भी 2027 के विधानसभा चुनाव में रोड़ा अटका सकता है। जानकार बताते हैं कि कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह का यह आखिरी चुनाव होगा। इसकी उन्हें सिंपैथी मिल सकती है। वर्तमान विधायक ऋषि त्रिपाठी का जहां तक सवाल है उन्हें भी किसी तरह से कम नहीं आंका जा सकता है। अभी तक उनकी छवि बेदाग नेताओं में जानी जाती रही है। जानकार बताते हैं कि उनके द्वारा क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को देखते हुए 2027 के चुनाव में उन्हें जनता एक बार पुनः जीत का सेहरा पहना सकती है। नौतनवां विधानसभा क्षेत्र को लेकर भाजपा में एक बार फिर पंकज चौधरी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
