सऊदी अरब/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के 29वें दिन सऊदी अरब में ताजा संघर्ष ने दुनिया को हिलाकर रख दिया। शुक्रवार देर रात सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में अमेरिका का एक रिफ्यूलिंग प्लेन तबाह हो गया और 12 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए, जिनमें से दो गंभीर रूप से घायल हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के इस दौर में अब तक 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जिनमें से 273 सैनिक पहले ही ड्यूटी पर लौट चुके हैं। इस संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। हमले के दौरान कई रिफ्यूलिंग विमान भी क्षतिग्रस्त हो गए।
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अमेरिका की प्रतिक्रिया और रणनीति
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान कुछ हफ्तों में समाप्त करने की उम्मीद करता है। उन्होंने बताया कि जमीनी सैनिकों का इस्तेमाल किए बिना सभी उद्देश्यों को हासिल किया जा सकता है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। उन्होंने कहा कि देश युद्ध को तुरंत समाप्त करने के लिए तैयार है और परमाणु हथियारों के लिए कोई जगह नहीं है।
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अन्य क्षेत्रीय प्रभाव
- ईरान ने मिसाइल हमले से सेंट्रल तेल अवीव की मार्केट को नुकसान पहुँचाया, लेकिन हताहत की खबर नहीं है।
- अबू धाबी के खलीफा इकोनॉमिक ज़ोन में आग लगने की घटनाएं हुईं, जो रोकने में सफल मिसाइलों के मलबे से हुईं।
- तेहरान में भी इसराइल के हवाई हमलों के बाद लगभग 10 तेज़ धमाके सुनाई दिए और काले धुएं का गुबार देखा गया।
अमेरिका में विरोध प्रदर्शन
अमेरिका में शनिवार को ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत देशभर में 3,000 से अधिक रैलियों का आयोजन किया गया। प्रदर्शन में ईरान युद्ध के अलावा अन्य कई मुद्दों पर सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा।
ट्रम्प का बयान : पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि मध्य पूर्व अब ईरानी आतंक और परमाणु ब्लैकमेल से मुक्त हो गया है। उन्होंने ईरान में कई लक्ष्य पर हमले की बात कही और क्षेत्र के अन्य देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर का आह्वान किया।
