नेपाल की राजनीति में हुआ एक बड़ा और नाटकीय घटनाक्रम

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  • बालेन शाह के PM बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू। नेपाल की राजनीति में शनिवार सुबह जबरदस्त हलचल देखने को मिला। नवागत प्रधानमंत्री बालेन शाह के शपथ लेने के ठीक अगले दिन पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई साल 2025 में हुए ‘जेन-जी’ आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और दमन के आरोपों में की गई है। बता दें कि नेपाल की राजनीति में एक बड़ा और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 में हुए ‘Gen Z’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़े आपराधिक मामले में की गई है।

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पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का फाइल फोटो
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का फाइल फोटो

आपको बता दें कि इसी आंदोलन ने ओली को नेपाल की सत्ता से बेदखल कर दिया था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक ही दिन पहले रैपर से नेता बने बालेन शाह ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। इस मामले में नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। दोनों नेताओं को भक्तपुर स्थित उनके आवासों से गिरफ्तार किया गया और उन पर ऐसे प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किए जाने की संभावना है, जिनमें अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक का फाइल फोटो
पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक का फाइल फोटो

सितंबर 2025 में नेपाल में बड़े पैमाने पर युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें ‘Gen Z क्रांति’ कहा गया। इन प्रदर्शनों की शुरुआत डिजिटल स्वतंत्रता की मांग से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, खराब शासन और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। उस समय देश की बागडोर केपी शर्मा ओली के हाथ में थी। सरकार द्वारा इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई सख्त कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। हिंसा में कम से कम 76 लोगों की मौत हो गई और 2,000 से अधिक लोग घायल हुए। पहले ही दिन हुई गोलीबारी में कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की जान गई थी, जिससे जनाक्रोश और भड़क गया और अंततः ओली को इस्तीफा देना पड़ा।

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इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित एक उच्चस्तरीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट में केपी शर्मा ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी। आयोग ने कहा कि देश के कार्यकारी प्रमुख होने के नाते ओली को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि वे गोलीबारी को रोकने में विफल रहे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कार्यकारी प्रमुख के रूप में ओली को हर अच्छे और बुरे के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए। आयोग ने केवल ओली ही नहीं, बल्कि तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है। ओली ने इन आरोपों और आयोग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है।

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उन्होंने इस गिरफ्तारी को लापरवाहीपूर्ण, चरित्र हनन करने वाला और नफरत की राजनीति से प्रेरित बताया है। उनके अनुसार, यह रिपोर्ट राजनीतिक दुर्भावना से तैयार की गई है। यदि आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुकदमा चलता है और अदालत उन्हें दोषी ठहराती है, तो ओली, रमेश लेखक और अन्य संबंधित अधिकारियों को 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। राजनीतिक रूप से भी ओली के लिए यह समय कठिन रहा है। 5 मार्च को हुए आम चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेन शाह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था।

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