आयुर्वेद में कई बीमारियों का स्थाई इलाज है। बस एक बार आयुर्वेद के बैद्य या डॉक्टर आपकी बीमारीक की जड़ को पकड़ लें। आयुर्वेद में एक औषधि ऐसी है जो तमाम रोगों के लिए रामबाण साबित होती है। ये है कचनार का पेड़। कचनार का पेड़ भी है, जो अधिकतर कंडी क्षेत्र में ही पाया जाता है। मार्च मध्य के बाद फूलों से लदने वाले इस पेड़ की पत्तियां, तना व फूल आदि सभी उपयोगी हैं। कचनार की गणना सुंदर व उपयोगी वृक्षों में होती है। इसकी अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से गुलाबी कचनार का सबसे ज्यादा महत्त्व है। कचनार के फूलों की कली लंबी, हरी व गुलाबी रंगत लिए हुए होती है। आयुर्वेद में इस वृक्ष को चमत्कारिक और औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। कचनार के फूल और कलियां वात रोग,जोड़ों के दर्द के लिए विशेष लाभकारी हैं। इसकी कलियों की सब्जी व फूलों का रायता खाने में स्वादिष्ट और रक्त पित्त, फोड़े, फुंसियों को शांत करता है। आइए जानते हैं कचनार के गुणों के बारे में।
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थायराइड की समस्या
आयुर्वेद में कचनार को थायराइड समस्या के लिए सबसे प्रभावशाली माना है और कचनार व गुग्गुल के मिश्रण का सेवन करने की सलाह दी है। दरअसल थायराइड ग्लैंड में सूजन आने की वजह से थायराइड की समस्या होती है और कचनार में मौजूद एंटी इंफ्लेमेंटरी गुण इस सूजन को कम करके आपके शरीर में थायराइड को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। कचनार के फूल थायराइड की सबसे अच्छी दवा है। गले में गांठें हो गई हों, तो कचनार की छाल को चावल के धोवन में पीसिए, उसमें आधा चम्मच सौंफ का पाउडर मिलाकर खा लीजिए।
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मधुमेह की समस्या
मधुमेह की समस्या में रोगी के शरीर में ब्लड ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है, जो कि नियंत्रित न करने पर गंभीर रूप ले सकता है। इसके अलावा मधुमेह खुद के साथ दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, किडनी के रोग जैसी खतरनाक स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है। कचनार में मौजूद एंटी डायबिटिक गुण शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर कम करने में मदद करते हैं और आपके मधुमेह की बीमारी को नियंत्रित रखते हैं।
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सी की समस्या
खांसी खुद में एक बीमारी नहीं है, बल्कि आपके श्वास तंत्र में किसी परेशानी व बाधा आने की वजह से शरीर यह प्रतिक्रिया देता है। खांसी के द्वारा फेफड़े सांस के रास्ते में आने वाली किसी बाधा और परेशानी को हटाने की कोशिश करते हैं जैसे सूजन, बलगम, कोई एलर्जेन आदि। अगर आपको भी इन्हीं कारणों की वजह से खांसी की समस्या है, तो कचनार से बनी औषधि आपकी मदद कर सकती है। क्योंकि इसमें मौजूद एंटीइंफ्लेमेंटरी, एंटी कफ गुण होते हैं, जो आपको खांसी से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं।
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अर्थराइटिस की समस्या
कचनार के इस्तेमाल से आप अर्थराइटिस और सोरायसिस के मरीजों में होने वाली सोरायटिक अर्थराइटिस से राहत प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि अर्थराइटिस में आपके जोड़ों के बीच सूजन आ जाती है, जिससे वह पूर्ण क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पाते हैं और आपको उठने-बैठने, चलने-फिरने व कार्य करने में दिक्कत होती है और कचनार शरीर में किसी भी तरह की सूजन को कम करती है।
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कचनार के अन्य फायदे
बवासीर में कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलकर 11 दिन खाएं। आंतों में कीड़े हों तो कचनार की छाल का काढ़ा पिएं। लिवर में कोई तकलीफ हो, तो कचनार की जड़ का काढ़ा पिएं। गले की कोई भी ग्रंथि बढ़ जाने पर कचनार के फूल या छाल का चूर्ण चावलों के धोवन में पीस कर उसमे सोंठ मिलाकर लेप भी किया जा सकता है और पिया भी जा सकता है। कचनार की टहनियों की राख से मंजन करेंगे, तो दांतों में दर्द कभी नहीं होगा, अगर हो रहा होगा तो खत्म हो जाएगा। खून शुद्ध करने के लिए कचनार की कलियों का काढ़ा पी सकते हैं। मुंह में छाले होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा सा कत्था मिलाकर छालों पर लगाने से आराम मिलता है। पेट में गैस होने पर कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है।
