उत्तर प्रदेश शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा सेवा में बहाल कर दिया है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार उन्हें 15 मार्च 2026 से पुनः कार्यभार संभालने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पहले की तरह जारी रहेगी। यह आदेश राज्य सरकार के नियुक्ति अनुभाग-5 द्वारा 14 मार्च 2026 को जारी किया गया। आदेश में कहा गया है कि अधिकारी की निलंबन अवधि 14 मार्च 2026 तक मानी जाएगी और इसके बाद 15 मार्च से उनकी बहाली प्रभावी होगी। यह निर्णय राज्यपाल की अनुमति से लिया गया है।
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दरअसल, यह मामला उस समय सामने आया था जब पंजाब के फिरोजपुर निवासी विश्वजीत दत्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच के दौरान कई पहलुओं को देखते हुए शासन ने 20 मार्च 2025 को अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1969 के तहत कार्रवाई शुरू की थी। इसी क्रम में अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था और मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।
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अब एक वर्ष के बाद शासन ने निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें सेवा में वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि शासन ने स्पष्ट किया है कि बहाली का मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ चल रही जांच खत्म हो गई है। विभागीय कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी और जांच के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के तहत की जाती है, जिसमें निलंबन अवधि के बाद अधिकारी को सेवा में बहाल किया जा सकता है, लेकिन जांच जारी रह सकती है। फिलहाल शासन के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।
