नया लुक डेस्क
ईरान में नए सुप्रीम लीडर के तौर पर मुज्तबा खामेनेई के ऐलान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और लंबे युद्ध के लिए तैयार है। इसी बीच इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के तेज होने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखी गई है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इससे मिडिल ईस्ट में तेल उत्पादन और शिपिंग को लेकर चिंता बढ़ गई है और वित्तीय बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण पाकिस्तान और बांग्लादेश ने ईंधन बचाने के लिए स्कूल-कॉलेज बंद करने जैसे कदम उठाए हैं।
तेल बाजार में भारी उछाल
इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ब्रेंट क्रूड की कीमत दिन की शुरुआत में 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बाद में यह करीब 9% बढ़कर 101 डॉलर से ऊपर ट्रेड करता रहा। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 119 डॉलर के करीब पहुंचने के बाद लगभग 100 डॉलर के आसपास आ गया।
जी7 देशों की बैठक, बाजार स्थिर करने की कोशिश
तेल की बढ़ती कीमतों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर जी7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि बाद में समूह ने फिलहाल स्ट्रेटेजिक रिजर्व का उपयोग न करने का फैसला किया, लेकिन बाजार को स्थिर करने के लिए सभी विकल्प खुले रखने की बात कही।
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युद्ध से मिडिल ईस्ट की सप्लाई पर खतरा
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर उन इलाकों पर पड़ रहा है जहां से दुनिया को बड़ी मात्रा में तेल और गैस मिलती है। रिसर्च फर्मों के अनुसार दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
एशियाई देशों पर बढ़ता असर
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। चीन, दक्षिण कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। चीन ने इस संघर्ष को जल्द खत्म करने की अपील की है क्योंकि वह ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है।
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पाकिस्तान में ईंधन बचाने के सख्त कदम
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सरकारी खर्च कम करने के लिए बचत पैकेज की घोषणा की है। मंत्रियों ने तीन महीने तक वेतन न लेने का फैसला किया है, सरकारी वाहनों और ईंधन के उपयोग में भारी कटौती की गई है और कई सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। देश में शैक्षणिक संस्थान भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
बांग्लादेश में यूनिवर्सिटी बंद
ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश सरकार ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए देशभर की सभी यूनिवर्सिटी अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे बिजली की खपत कम होगी और पावर सिस्टम पर दबाव घटेगा।
भारत पर फिलहाल सीमित असर
भारत पर इस संकट का असर अभी सीमित बताया जा रहा है। भारत कई देशों से तेल आयात करता है और उसके पास पर्याप्त भंडार भी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने की जरूरत नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
