प्रयागराज। यौन शोषण के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 27 फरवरी को सुनवाई निर्धारित की गई है। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी ने अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है, जिस पर जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ सुनवाई करेगी।
यह मामला झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के अलावा शिकायतकर्ता, पीड़ित पक्ष, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को भी पक्षकार बनाया गया है। अधिवक्ताओं की टीम ने स्वामी की ओर से अदालत में यह याचिका प्रस्तुत की है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जिला अदालत के आदेश से हुई थी, जिसमें पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने दोनों नाबालिग पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया जा चुका है।
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शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि पीड़ितों के बयानों में अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यदि अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलती है, तो पुलिस गिरफ्तारी की कार्रवाई कर सकती है। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील बन गया है। अदालत का फैसला आने के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो पाएगी।
