राजेन्द्र गुप्ता
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज का पर्व आज श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ फूलों की होली खेली थी। यही कारण है कि इस दिन ब्रज क्षेत्र के मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और चारों ओर फूलों की सुगंध व भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिलता है। मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
शुभ मुहूर्त और तिथि : हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 18 फरवरी 2026 को शाम 04:57 बजे से शुरू होकर 19 फरवरी 2026 को दोपहर 03:58 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर फुलेरा दूज का मुख्य पर्व आज, 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को मनाया जा रहा है। शास्त्रों में इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। यानी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य बिना पंचांग देखे भी किए जा सकते हैं। ज्योतिष मान्यता के अनुसार यह दिन दोषमुक्त होता है और इस दिन शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है।
फुलेरा दूज पर करें ये शुभ कार्य
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और राधा-कृष्ण पूजन का संकल्प लें।
- पूजा में ताजे और सुगंधित फूलों का प्रयोग करें। भगवान श्रीकृष्ण को पीले फूल विशेष रूप से अर्पित करें।
- ठाकुर जी को प्रेमपूर्वक गुलाल का टीका लगाएं।
- भगवान की कमर पर गुलाल से भरी छोटी पोटली बांधने की परंपरा निभाएं, जो होली के आगमन का संकेत मानी जाती है।
- प्रसाद में माखन-मिश्री, पोहा या सफेद मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना गया है।ये भी पढ़ें
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन काले या गहरे रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। घर में सात्विक भोजन बनाएं और मांस-मदिरा जैसी तामसिक चीजों से दूर रहें। साथ ही किसी का अपमान न करें और मन में क्रोध या ईर्ष्या न रखें, क्योंकि यह पर्व प्रेम, सौहार्द और क्षमा का संदेश देता है।
विवाह बाधा दूर करने का विशेष दिन
मान्यता है कि फुलेरा दूज के दिन राधा-कृष्ण की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि सच्चे मन से किया गया दान सुख-समृद्धि और धन लाभ के योग बनाता है।
