PM मोदी के संसदीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार की खबर ने उड़ाई कइयों की नींद
विनय मौर्या
बनारस। भगवान विश्वनाथ की धरती वाराणसी के कैंटोमेंट क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण और संपत्ति लेन-देन को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच करोड़ों की संपत्तियों के स्वामित्व और निर्माण स्वीकृति से जुड़े पहलुओं की परत-दर-परत पड़ताल सामने आने लगी है। चर्चा है कि मामला केवल “होटल वरुणा” और एक निर्माणाधीन भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समीप “मैथली भवन” नाम से एक अन्य इमारत खड़ी कर उसे बेचने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह भवन कथित रूप से बाढ़ प्रभावित (डूब क्षेत्र) में बनाया गया और
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इसका विधिवत मानचित्र स्वीकृत नहीं था। मीडिया रिपोर्टों में वर्ष 2023 के दौरान वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) द्वारा संदीप झा की पत्नी संगीता झा को नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई थी। उस समय शीघ्र ध्वस्तीकरण कार्रवाई की संभावना जताई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य जारी रहा और अब तक भवन पर कोई कार्रवाई दिखाई नहीं देती। होटल को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वरुणा नदी किनारे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के पास स्थित है।
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ऐसे में यह जांच का विषय बनता है कि लाइसेंस किन मानकों पर जारी हुआ और नई इमारतों के निर्माण की स्वीकृति कैसे मिली। स्थानीय आरोप यह भी हैं कि जमीन खरीद के दौरान रास्ते अवरुद्ध करने और दबाव बनाकर कम कीमत पर संपत्ति लेने की कोशिश की गई। दस्तावेजों में पत्नी संगीता झा, भाई प्रवीण झा तथा साझेदार शैलेश चौधरी (मूल निवासी हावड़ा) के बीच संपत्ति विक्रय से जुड़े कागजात सामने आने की बात भी कही जा रही है। फिलहाल ये सभी दावे जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण स्वीकृतियों, प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित संरक्षण की वास्तविक स्थिति क्या है। पड़ताल जारी है और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया तथा आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
