ईशानदार किशनः एक बिहारी, पूरे पाकिस्तान पर भारी

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श्वेता शर्मा
     श्वेता शर्मा

  • कोलम्बो के प्रेमदासा स्टेडियम में गूंजा-‘जिया हो बिहार के लाला’
  • अभिषेक के साथ ईशान बन गए हैं दुनिया के सबसे खतरनाक ओपनर

जब वो खेलता है तो केवल खेलता है। हां, 80 फीसदी रन केवल ऑनसाइड बनाता है, लेकिन बनाता है तो धूम-धड़ाके के साथ। ये उसका बिहारीपना ही है कि गेदों को ज्यादा से ज्यादा ऑनसाइड मारता है। दुनिया जानती है कि गांव, गली-कूचे और छोटे शहरों से निकले लड़के केवल ऑन साइड पर ही हिट करना जानते हैं। ये भी उतना ही जानता है, लेकिन जो जानता है बिल्कुल फिट जानता है। ‘क्लीन हिट’ उसका शगल है और उसकी ताकत भी। तभी तो जियो हॉट स्टार पर कमेंट्री करते हुए बिहार के मशहूर अभिनेता एवं बीजेपी सांसद मनोज तिवारी कहते हैं- ‘एक बिहारी, पूरे पाकिस्तान पर भारी।’ जी हां, इशान किशन ने न केवल शानदार शॉट मारे बल्कि जब कोलम्बो के प्रेमदासा स्टेडियम में बड़ा धमाका किया। छोटा डायनामाइट के नाम से मशहूर इशान ने तीन नम्बर पर खेलने आए तिलक वर्मा के साथ 87 रनों की साझेदारी में इशान के कुल 77 रन शामिल थे। यानी तीन नम्बर पर आकर भारत के लिए लगातार दो शतक जड़ चुके धुआंधार बल्लेबाज तिलक वर्मा जब तक 10 रन बनाते, तब तक किशन ने 77 रन ठोंक डाले। किशन ने इस पारी में 10 चौके और तीन गगनचुम्बी छक्के जड़े। क्रिकेट के जानकारों का कहना है कि इस कठिन पिच पर स्पिन गेंदबाजी के सामने इस तरह धुआंधार खेलकर किशन ने गेम को एकतरफा कर दिया। पिच का मिजाज भी ठीक नहीं था। तभी तो पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान, सैम अयूब, सलमान आगा, बाबर आजम, शादाब खान और मोहम्मद नवाज जैसे बल्लेबाज पैर नहीं जमा पाए। पांच नम्बर पर खेलने आए उस्मान खान के 44 रनों की बदौलत भले ही पाकिस्तान 114 रनों के स्कोर तक पहुंच गया लेकिन वह भारत से 61 रनों से बुरी हार झेलनी पड़ी।

हिंदुस्तान का शर्मा भारत का ‘अभिषेक’

मैच के बाद एक एक्सपर्ट से बात करते हुए तिलक वर्मा ने खुलासा किया कि जब इशान पाकिस्तानी गेंदबाजों की खैर ले रहा था, तो बीच में मुझसे बात करने आया। मैंने उसे दो टूक लहजे में कहा- ‘भाई तू मारता रह, मैं दूसरे छोर से विकेट संभाल के रखूंगा।’ हुआ भी वही और किशन ने किया भी वही। उसकी तेजतर्रार पारी की बदौलत ही उस कठिन पिच पर भारत 175 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर पाया और इतनी बड़ी जीत नसीब हुई। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रतींद्र नाथ कहते हैं कि मैच हो या राजनीति की पिच, जब भी बिहार के बैट्समैन की बारी आती है तो वो धुंआधार पारी खेलता है। तीसरे मोर्चे की सरकार में लालू की हार्ड हिटिंग दुनिया देख चुकी है। वहीं मोदी के साथ उनके ‘हनुमान’ चिराग पासवान की पारी अभी भी जारी है। इसके पहले जार्ज फर्नांडीज से लेकर यशवंत सिन्हा तक देश के लिए बड़ी पारी खेल चुके हैं। अखंड बिहार के रांची का लड़का महेंद्र सिंह धोनी भारत को कई कप दिला चुका है। इशान-दार किशन की धारदार पारी ने पाकिस्तान के दिल में जो खौफ डाला, पूरी टीम मैच के दौरान उससे उबर नहीं पाई। ट्रम्प कार्ड का हो-हल्ला मचाकर मिस्ट्री स्पिनर उस्मान तारिक को इशान के सामने लाने की हिम्मत उसके कप्तान सलमान आगा नहीं दिखा सके।

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पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता मोहसिन रजा कहते हैं कि अपने करियर के शुरुआती दौर में किशन को केवल विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में देखा जाता था, लेकिन हाल के समय में उनके खेल में संतुलन और रणनीतिक समझ स्पष्ट दिखाई देती है। टी20 विश्व कप 2026 में उनकी बल्लेबाजी ने दिखाया कि अब वे केवल आक्रामक नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार खेल को नियंत्रित करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। विशेषज्ञ इसे “ईशान किशन 2.0” का दौर बता रहे हैं, जहां आक्रामकता के साथ धैर्य भी जुड़ गया है। वह कहते हैं कि इसलिए घरेलू क्रिकेट सभी खिलाड़ियों को खेलना चाहिए। ईशान की वापसी भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह कहानी बताती है कि घरेलू क्रिकेट अभी भी अंतरराष्ट्रीय चयन का मजबूत आधार है। लगातार प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी देर-सवेर वापसी का रास्ता बना ही लेता है।


इशान किशनः हारकर जीतने वाले को ‘बाजीगर’ कहते हैं…

भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं की कभी कमी नहीं रही, लेकिन हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी लम्बी दौड़ तय नहीं कर पाता। कुछ खिलाड़ी अपनी आक्रामक शैली से पहचान बनाते हैं, तो कुछ अपने संघर्ष और वापसी से इतिहास लिखते हैं। युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन आज भारतीय क्रिकेट में ऐसे ही खिलाड़ियों की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं, जिनकी कहानी केवल रन बनाने की नहीं बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और पुनर्निर्माण की कहानी है। एक समय भारतीय टीम के नियमित चेहरे रहे ईशान किशन अचानक टीम से बाहर हो गए। केंद्रीय अनुबंध से बाहर होना और चयनकर्ताओं की प्राथमिकताओं से दूर होना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका होता है। लेकिन किशन ने निराशा को विराम नहीं बनने दिया। उन्होंने घरेलू क्रिकेट को अपनी वापसी का माध्यम बनाया और झारखंड के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को फिर साबित किया।

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके बल्ले से निकले रन और खिताबी जीत ने चयनकर्ताओं को पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया। पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाकर उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रतिभा का सबसे बड़ा प्रमाण निरंतर प्रदर्शन ही होता है। भारत-पाकिस्तान जैसे दबाव वाले मुकाबलों में उनका आत्मविश्वास और ‘नो पैनिक’ वाला रवैया टीम के भीतर बदलती मानसिकता को दर्शाता है। किशन की बल्लेबाजी अब केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन नहीं, बल्कि टीम की रणनीति का हिस्सा बनती जा रही है।
आज ईशान किशन भारतीय क्रिकेट के उस दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां खिलाड़ी केवल प्रतिभा के भरोसे नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और अनुशासन से आगे बढ़ते हैं। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि करियर में ठहराव अंत नहीं होता। कई बार वही नई शुरुआत का आधार बनता है। यदि यही निरंतरता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में ईशान किशन केवल एक आक्रामक बल्लेबाज नहीं, बल्कि भारतीय टीम के भरोसेमंद मैच-विनर और नेतृत्व क्षमता वाले खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो सकते हैं।

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