दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान और तकनीक को जनहित से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों का उद्देश्य केवल नवाचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाने के लिए होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी शोध तभी सार्थक होते हैं जब वे मानवता के लिए उपयोगी सिद्ध हों। उन्होंने एक संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए बताया कि सुनने की इच्छा, गहराई से समझने की क्षमता, तर्क और सही निर्णय — ये सभी बुद्धिमत्ता के मूल आधार हैं। यही गुण तकनीकी विकास को जिम्मेदार और नैतिक दिशा प्रदान करते हैं।
पहले दिन का आकर्षण: AI एक्सपो और स्टार्टअप संवाद
समिट के पहले दिन पीएम मोदी ने AI एक्सपो का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और टेक्नोलॉजी लीडर्स से बातचीत की और विभिन्न क्षेत्रों में AI के व्यावहारिक उपयोगों को करीब से देखा। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में AI आधारित समाधानों को प्रदर्शित किया गया, जो भारत की तकनीकी प्रगति को दर्शाते हैं।
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वैश्विक भागीदारी और भारत की भूमिका
इस समिट में 13 देशों की भागीदारी देखने को मिल रही है, जिनमें Australia, Japan, United Kingdom, France, Germany और Italy जैसे राष्ट्र शामिल हैं। इसके अलावा कई अफ्रीकी देशों ने भी AI सहयोग में रुचि दिखाई है।
समिट में 300 से अधिक थीमैटिक पवेलियन और 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स अपने AI मॉडल और समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। “People, Planet और Progress” जैसे तीन प्रमुख विषयों पर आधारित प्रदर्शनी में नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन स्पष्ट दिख रहा है।
प्रधानमंत्री 19 फरवरी को सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे, जहां वे भारत की “Inclusive, Trusted and Development-Oriented AI” दृष्टि को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगे।
