मनोज बाजपेयी की चर्चित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपनी रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के शीर्षक को लेकर उठे विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने फिल्म निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे से सवाल किया कि किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला शीर्षक क्यों चुना गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिले अधिकार पर अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध लागू होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर किसी वर्ग विशेष को निशाना नहीं बनाया जा सकता।
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कोर्ट की सख्त टिप्पणी
पीठ ने कहा कि देश विविधताओं से भरा है, जहां अलग-अलग धर्म और जातियों के लोग साथ रहते हैं। ऐसे में समाज में भाईचारे की भावना बनाए रखना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब समाज पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब ऐसी फिल्मों से और तनाव पैदा करना उचित नहीं है।
क्या बदलेगा फिल्म का नाम?
सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माता की ओर से बताया गया कि फिल्म का नाम बदलने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया से टीजर और अन्य प्रमोशनल सामग्री हटा दी गई है। निर्माता पक्ष का कहना है कि यह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें किसी धार्मिक व्यक्ति को नहीं दिखाया गया है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि यदि नया नाम पेश नहीं किया गया तो फिल्म की रिलीज पर रोक लग सकती है। मामले में केंद्र सरकार, सीबीएफसी और फिल्म निर्माता को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की गई है।
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
3 फरवरी को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी टीजर के बाद फिल्म का विरोध शुरू हुआ। सोशल मीडिया पर नाराजगी बढ़ी और कुछ जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। इसके बाद मामला अदालत पहुंच गया।
