Business : देशभर के करीब 50,000 से अधिक होमबायर्स के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शीर्ष अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड की 16 लंबित आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेश को बरकरार रखते हुए इन सभी परियोजनाओं को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को सौंपने की मंजूरी दे दी है । यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है, जो बीते 12 से 15 वर्षों से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे थे।
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किन परियोजनाओं से जुड़े हैं हजारों होमबायर्स?
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, सुपरटेक की जिन 16 परियोजनाओं को NBCC को सौंपा जाएगा, वे मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य क्षेत्रों में स्थित हैं। इन परियोजनाओं की शुरुआत वर्ष 2010 से 2012 के बीच हुई थी। अनुमान के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स में करीब 49,748 से 50,000 से ज्यादा आवासीय यूनिट्स शामिल हैं, जिससे लगभग 50,000–51,000 परिवार प्रभावित हुए थे। अधिकांश होमबायर्स ने फ्लैट की पूरी या बड़ी रकम पहले ही चुका दी थी, लेकिन सालों बाद भी न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही कब्जा मिला।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लिमिटेड पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सुपरटेक कंपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है। कंपनी पर फंड डायवर्जन यानी पैसों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। होमबायर्स के हितों की रक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए परियोजनाओं का प्रबंधन किसी सक्षम और भरोसेमंद संस्था को दिया जाना जरूरी है। कोर्ट ने साफ कहा कि इन परिस्थितियों में NBCC को परियोजनाएं सौंपना ही सबसे उचित समाधान है।
3 साल में पूरे करने होंगे सभी प्रोजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट ने NBCC को अधिकतम 3 वर्षों के भीतर सभी 16 परियोजनाओं का निर्माण पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अब कोई भी अन्य अदालत, ट्रिब्यूनल या मंच हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा। इससे निर्माण प्रक्रिया में किसी तरह की कानूनी अड़चन आने की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
होमबायर्स के लिए क्यों है यह फैसला खास?
यह फैसला उन होमबायर्स के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय से आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। कई खरीदार ईएमआई भी चुका रहे थे और किराए के घरों में रहने को मजबूर थे। NBCC इससे पहले भी आम्रपाली ग्रुप जैसी अटकी हुई परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है। यही वजह है कि होमबायर्स को अब उम्मीद है कि सुपरटेक के प्रोजेक्ट्स भी तय समय में पूरे होंगे और उन्हें आखिरकार अपने घरों का कब्जा मिलेगा।
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रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अहम संदेश
इस फैसले को रियल एस्टेट सेक्टर में होमबायर्स के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। यह निर्णय साफ संदेश देता है कि अगर कोई बिल्डर खरीदारों के पैसे का दुरुपयोग करेगा और समय पर प्रोजेक्ट पूरे नहीं करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। देश के दिल्ली-एनसीआर, मुंबई-एमएमआर और अन्य बड़े शहरों में आज भी कई परियोजनाएं सालों से अटकी हुई हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में अन्य मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
उम्मीद की नई शुरुआत
कुल मिलाकर, सुपरटेक की 16 अटकी परियोजनाओं को NBCC को सौंपने का फैसला न सिर्फ हजारों परिवारों के सपनों को नई उम्मीद देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि न्याय व्यवस्था अब होमबायर्स के साथ मजबूती से खड़ी है।
