महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चल रही अटकलों के बीच बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है। एनसीपी के लोकसभा सांसद और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने साफ संकेत दिया है कि उनकी पार्टी का भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ रहना कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि एक स्थायी और विचारपूर्ण फैसला है। रविवार को पार्टी के एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए तटकरे ने बिना किसी दल का नाम लिए कहा कि एनडीए के साथ रहना उनकी पार्टी का अंतिम निर्णय है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरे गुटों को यह तय करना होगा कि वे इस रुख से सहमत हैं या नहीं। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के लिए सीधे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
ये भी पढ़े
दिव्यांग बच्चों के समावेशी शिक्षा हेतु BRC घुघली पर शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
विलय की चर्चा पर उठाए सवाल
सुनील तटकरे ने यह सवाल भी उठाया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही पार्टी विलय की चर्चाएं क्यों शुरू हो गईं। उन्होंने कहा कि एनसीपी विधायक दल अजित पवार की मेहनत और नेतृत्व का परिणाम है और उसी सामूहिक निर्णय के तहत पार्टी ने एनडीए में शामिल होने का फैसला किया था।
तटकरे ने दावा किया कि यह निर्णय धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और शाहू-फुले-आंबेडकर की विचारधारा से समझौता किए बिना लिया गया था और इसे महाराष्ट्र की 12 करोड़ जनता का समर्थन प्राप्त है।
बीजेपी नेतृत्व की सराहना
एनडीए के भीतर भाजपा के व्यवहार की सराहना करते हुए तटकरे ने कहा कि भाजपा ने कभी भी एनसीपी के आंतरिक या मंत्रिमंडलीय फैसलों में हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में आपसी सम्मान और सहयोग की भावना देखने को मिलती है।
विलय पर दो टूक
तटकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी पार्टी विलय की बात नहीं की। उन्होंने खुद को शरद पवार का पुराना और विश्वसनीय सहयोगी बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठा रखी है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में एनडीए के साथ रहना ही पार्टी के हित में है।
ये भी पढ़े
तिलक वर्मा की वापसी, आयुष बदोनी को कमान; USA के खिलाफ इंडिया ए की टीम घोषित
