विभाग पर भारी ACS का करीबी अधिकारी, तानाशाह ऐसा कि कार्य हुआ बाधित

रिटायर भ्रष्ट अफसरों
  • चीनी मिल संघ के साथ मिला आबकारी का अतिरिक्त प्रभार
  • सप्ताह में सिर्फ एक दिन आते चीनी मिल संघ कार्यालय
  • ACS  के करीबी होने के कारण संघ अधिकारियों ने साधी चुप्पी

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। सैंया भय कोतवाल तो अब काहे का डर… यह कहावत उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ के संयुक्त प्रबंध निदेशक पर एक दम फिट बैठती है। चीनी मिल संघ के संयुक्त प्रबंध निदेशक चीनी मिलों का काम आबकारी विभाग में बैठकर निपटा रहे है। संयुक्त प्रबंध निदेशक के पास आबकारी विभाग का अतिरिक्त प्रभार होने की वजह से वह सहकारी चीनी मिल संघ के दफ्तर में आते ही नहीं है। मामला उच्चाधिकारी से जुड़ा होने की वजह से संघ के अधिकारियों ने इस गंभीर मामले पर चुप्पी साध रखी है। मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार का बहराइच तबादला होने के बाद बहराइच के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रहे नवनीत सेहरा को उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ का संयुक्त प्रबंध निदेशक पद पर तैनाती की गई। बताया गया है तैनाती के कुछ दिनों बाद ही चीनी मिल संघ के संयुक्त प्रबंध निदेशक को आबकारी विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।

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सूत्रों का कहना है कि सहकारी चीनी मिल संघ के संयुक्त प्रबंध निदेशक ने आबकारी विभाग का प्रभार मिलने के बाद से संघ कार्यालय आना कम कर दिया। संघ की जरूरी फाइलों को आबकारी कार्यालय में मंगाकर निपटाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो चीनी मिल संघ के संयुक्त प्रबंध निदेशक नवनीत सेहरा के चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव से करीबी रिश्ते होने की वजह से संघ के अधिकारियों और कर्मियों ने चुप्पी साध रखी है। संयुक्त प्रबंध निदेशक की मनमानी का यह आलम है कि वह सप्ताह के पांच दिन आबकारी कार्यालय में बैठते है और सिर्फ एक दिन शनिवार को चीनी मिल संघ कार्यालय आते हैं। ज्वाइंट एमडी की इस तानाशाही से चीनी मिल संघ का कार्य बाधित हो रहा है। इस संबंध मे जब चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव वीणा कुमारी मीणा से बात करने का प्रयास किया गया तो उनके निजी सचिव ने बताया कि मैडम अभी व्यस्त हैं अभी बात नहीं हो सकती है।

बंदी के कगार पर पहुंच रहा सहकारी चीनी मिल संघ!

अधिकारियों और कर्मियों की कमी के चलते उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ का हाल बेहाल होता जा रहा है। संघ में अधिकारियों की संख्या कम होने की वजह से एक एक अधिकारी के पास कई कई अनुभागों की जिम्मेदारियां सौंप रखी गई है। यही नहीं संघ में कुछ अधिकारियों से रिटायरमेंट के बाद भी महत्वपूर्ण अनुभागों का काम लिया जा रहा है। संघ में अकाउंटेंट का महत्वपूर्ण काम भी सेवानिवृत लेखाधिकारी से लिया जा रहा है। यह तो बानगी है इस प्रकार कई सेवानिवृत अधिकारियों को अस्थाई नियुक्ति देकर काम कराया जा है। हकीकत यह है कि संघ में दिनोदिन अधिकारियों की संख्या कम होतिबजा रही है। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब सहकारी चीनी मिल संघ बंदी के कगार पर पहुंच जाएगा।

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