प्रयागराज में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आध्यात्मिक और धार्मिक दौरा देखने को मिला। मुख्यमंत्री सुबह लखनऊ से रवाना होकर बमरौली एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से वे सड़क मार्ग द्वारा वीआईपी घाट पहुंचे। वहां से स्टीमर के माध्यम से संगम नोज तक गए। संगम क्षेत्र में मुख्यमंत्री के स्नान के लिए फ्लोटिंग जेटी पर विशेष इंतजाम किए गए थे। सीएम योगी ने विधि-विधान से पवित्र संगम में स्नान कर पूजा-अर्चना की।
संगम स्नान के बाद मुख्यमंत्री वापस वीआईपी घाट लौटे और वहां से सीधे हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन-पूजन किया। इसके पश्चात वे खाक चौक स्थित प्रधानमंत्री सतुआ बाबा आश्रम पहुंचे, जहां आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के संस्थापक स्वामी चिदानंद सरस्वती सहित बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के आगमन पर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
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अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज को केवल नदियों का संगम नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और ज्ञान की त्रिवेणी बताया। उन्होंने कहा कि यह नगरी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की पहचान है। सीएम योगी ने रामानंदाचार्य के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को जोड़ने का कार्य किया और जाति व भेदभाव से ऊपर उठकर भक्ति का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामानंदाचार्य के शिष्यों ने भी समाज में समरसता और एकता की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने सामाजिक विभाजन पर चिंता जताते हुए कहा कि जाति और संप्रदाय के आधार पर समाज को बांटने के परिणाम पड़ोसी देशों में देखे जा सकते हैं। सीएम योगी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने सनातन परंपराओं को बदनाम करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति समाज को जोड़ने वाली शक्ति है और इसे कमजोर करने वाले तत्वों से सतर्क रहना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने संतों से समाज में सद्भाव, एकता और सांस्कृतिक चेतना के संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
