अमेरिकी राजनीति में बयानबाज़ी के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल मचा दी है। इस बार उनके निशाने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों रहे। ट्रंप ने टैरिफ नीति को लेकर दावा किया कि फ्रांस ने अमेरिकी दबाव में आकर दवाओं की कीमतें बढ़ाने पर सहमति जताई।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से वैश्विक दवा कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाता रहा है, क्योंकि अमेरिकी नागरिक अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक कीमत चुकाते हैं। इसी असंतुलन को खत्म करने के लिए उन्होंने सख्त टैरिफ नीति अपनाई।
टैरिफ बना दबाव का हथियार
रिपब्लिकन नेताओं के सामने बोलते हुए ट्रंप ने बताया कि उन्होंने फ्रांस को साफ चेतावनी दी थी— या तो अमेरिकी मांगें मानो या फिर फ्रांस से आने वाले सभी प्रमुख उत्पादों पर भारी टैक्स झेलने के लिए तैयार रहो। इसमें शैंपेन और वाइन जैसे लोकप्रिय उत्पाद भी शामिल थे।
ट्रंप ने व्यंग्य करते हुए कहा कि टैरिफ की यह धमकी इतनी प्रभावी रही कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने उनसे निजी तौर पर अपील की कि इस बातचीत को सार्वजनिक न किया जाए।
अमेरिका को फायदा, बाकी देशों पर दबाव
ट्रंप ने दावा किया कि इस नीति का सीधा फायदा अमेरिकी उपभोक्ताओं को हुआ। जहां फ्रांस में दवाओं की कीमतें कई गुना बढ़ीं, वहीं अमेरिका में इनकी लागत कम हुई। उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस पर लगाया जाने वाला प्रस्तावित टैरिफ उनकी मांग से कई गुना ज्यादा था, जिससे दबाव और बढ़ गया।
हालांकि, ट्रंप के इन बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं। अब तक फ्रांस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है, जिससे यह मामला और भी सियासी चर्चा का विषय बन गया है।
