उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रायाबुजुर्ग गांव में गुरुवार को प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम ने एक अवैध रूप से निर्मित मस्जिद और दो-तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही नोटिस प्रक्रिया और तय समयसीमा के बावजूद अतिक्रमण न हटाए जाने के बाद की गई।
प्रशासन के अनुसार, रायाबुजुर्ग गांव के पास स्थित सरकारी भूमि पर कुछ लोगों ने बिना अनुमति निर्माण कर लिया था। जांच में सामने आया कि इनमें एक धार्मिक ढांचा और कुछ आवासीय मकान शामिल थे। अतिक्रमणकारियों को पहले नोटिस जारी किए गए और स्वयं निर्माण हटाने के लिए समय भी दिया गया, लेकिन तय अवधि समाप्त होने के बावजूद अवैध निर्माण जस का तस बना रहा। संभल के क्षेत्राधिकारी कुलदीप कुमार ने बताया कि संबंधित लोगों ने प्रशासन से तीन दिन का समय मांगा था। समय पूरा होने के बाद भी निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके चलते कानून के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
UP SIR Draft Voter List जारी आज, 12.55 करोड़ मतदाताओं की रफ सूची होगी प्रकाशित
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी घटनास्थल पर मौजूद रहे, हालांकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, वे जमीन और निर्माण से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। नोटिस दिए जाने के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके बाद प्रशासन को मजबूरन ध्वस्तीकरण करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अब स्वयं भी अतिक्रमण हटाने में सहयोग कर रहे हैं।
तहसीलदार ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2012 से 2014 के बीच सरकारी भूमि और तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण कर उनका व्यावसायिक उपयोग किया गया था। इनमें बरात घर जैसे ढांचे भी शामिल थे। ऐसे सभी अतिक्रमण पहले ही हटाए जा चुके हैं और मौजूदा कार्रवाई उसी क्रम का हिस्सा है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की बात कही है। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखना प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।
