- मंत्रिमंडल विस्तार और 2027 के चुनावी रोडमैप पर हुई चर्चा
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़े कई अहम मुद्दों के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी विस्तार से मंथन हुआ।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब बीजेपी संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर बदलावों का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि यूपी मंत्रिमंडल में संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर भी इस बैठक में चर्चा हुई है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अब सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटती दिख रही है।
करीब एक घंटे चली बातचीत
प्रधानमंत्री आवास पर हुई यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक समीकरण और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है। हालांकि, बैठक के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
दिल्ली प्रवास के दौरान सीएम योगी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों को संगठनात्मक रणनीति और आगामी चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीते कुछ महीनों में बीजेपी संगठन में कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं। हाल ही में नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने और उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से सियासी हलचल तेज हो गई है। पंकज चौधरी का निर्विरोध चयन भी पार्टी के भीतर एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
विधायकों की बैठकों से बढ़ी चर्चा
यूपी की राजनीति उस वक्त और गरमा गई थी, जब बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की लखनऊ में एक सहभोज बैठक सामने आई। इस बैठक में करीब 40 विधायक और एमएलसी शामिल हुए थे। इससे पहले ठाकुर, लोध और कुर्मी समुदाय से जुड़े जनप्रतिनिधियों की भी अलग-अलग बैठकें हो चुकी हैं। इन घटनाओं ने सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और हवा दी।
इन सभी घटनाक्रमों को देखते हुए पीएम मोदी और सीएम योगी की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक 2027 के चुनावी खाके और सरकार के अगले कदमों की दिशा तय कर सकती है।
