इस साल पांच राज्यों के चुनाव तय करेंगे महागठबंधन की एकता

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संजय सक्सेना

साल 2025 के विदा होते ही भारतीय राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। नए साल 2026 की शुरुआत ऐसे दौर से हो रही है, जहां एक के बाद एक चुनाव देश की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाले हैं। यह साल केवल राज्यों की सत्ता का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि विपक्षी एकजुटता जमीन पर कितनी मजबूत है और क्या वह सत्तारूढ़ एनडीए को वास्तविक चुनौती दे पाने की स्थिति में है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी इन पांच जगहों पर होने वाले विधानसभा चुनावों को सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इन पांच राज्यों में कुल 824 विधानसभा सीटें हैं। पश्चिम बंगाल में 294, तमिलनाडु में 234, केरल में 140, असम में 126 और पुडुचेरी में 30 सीटों पर चुनाव होंगे। इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चार राज्यों में मौजूदा सरकारें इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के पास हैं, जबकि असम में भाजपा सत्ता में है और पुडुचेरी में एनडीए की सरकार चल रही है। ऐसे में यह मुकाबला एनडीए से ज्यादा विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की मजबूती और उसकी आपसी तालमेल की परीक्षा बन गया है।

काफी खट्टी मीठी यादें छोड़ गया 2025

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2011 से सत्ता में हैं और 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर भाजपा को 77 सीटों पर रोक दिया था। हालांकि, भाजपा लगातार दावा करती रही है कि बंगाल में उसका वोट शेयर बढ़ रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत महज डेढ़ फीसदी बढ़ा, जबकि तृणमूल का वोट शेयर करीब तीन फीसदी मजबूत हुआ। 2026 में ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में होंगी, जबकि कांग्रेस और वाम दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते दिखेंगे। भाजपा के सामने चुनौती यह है कि कांग्रेस-वाम के कमजोर होने के बावजूद उसका सीधा लाभ उसे नहीं, बल्कि तृणमूल को मिला है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु का चुनाव सबसे दिलचस्प माना जा रहा है। 2021 में डीएमके ने 234 में से 133 सीटें जीतकर सत्ता संभाली थी और कांग्रेस ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। एआईएडीएमके 66 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि भाजपा को गठबंधन में रहते हुए 4 सीटें मिली थीं। अब हालात बदल चुके हैं। एआईएडीएमके और भाजपा का गठबंधन टूट चुका है और राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब अभिनेता थलपति विजय ने तमिलागा वेट्ट्री कड़गम के नाम से अपनी पार्टी बना ली। इससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। डीएमके के सामने सत्ता दोहराने की चुनौती है, वहीं AIADMK खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में है और भाजपा अपने संगठन विस्तार पर जोर दे रही है।

नई सदी मे देश में तरक्की का दौर जारी है…आरहा 2026

केरल में राजनीतिक परंपरा रही है कि हर पांच साल में सत्ता बदलती है, लेकिन 2021 में पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। एलडीएफ ने 140 में से 99 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ विपक्ष में चला गया था। 2026 का चुनाव पिनराई विजयन के लिए ऐतिहासिक हो सकता है। अगर वह तीसरी बार सत्ता में लौटते हैं, तो यह केरल ही नहीं, देश की वाम राजनीति के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी। दूसरी ओर कांग्रेस पूरी ताकत से वापसी की कोशिश में है। प्रियंका गांधी केरल से सांसद हैं और केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ नेता राज्य की रणनीति संभाल रहे हैं। भाजपा का लक्ष्य यहां सीटों की संख्या बढ़ाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना है। पूर्वोत्तर में असम का चुनाव भाजपा के लिए सबसे अहम माना जा रहा है। 2016 से सत्ता में काबिज भाजपा ने 2021 में 126 में से 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी हैट्रिक की तैयारी में है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 50 सीटों पर सिमट गया था और अब वह अपने लंबे राजनीतिक वनवास को खत्म करने की कोशिश करेगा। असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ तीसरे मोर्चे के रूप में असर डाल सकती है, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 2021 में एनआर कांग्रेस और भाजपा गठबंधन ने 30 में से 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। एन रंगासामी मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस महज दो सीटों पर सिमट गई थी। 2026 में यहां फिर से एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। छोटे राज्य होने के बावजूद पुडुचेरी का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति में संदेश देने वाला माना जाता है। विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2026 में 75 राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश की 10, बिहार की 5, महाराष्ट्र की 7, राजस्थान और मध्य प्रदेश की 3-3 सीटें खाली होंगी। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राज्यसभा चुनाव होंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं, जिन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है।कुल मिलाकर 2026 का साल भारतीय राजनीति के लिए निर्णायक साबित होने जा रहा है। यह साल बताएगा कि विपक्षी दलों की एकजुटता सिर्फ मंचों और बयानों तक सीमित है या वह चुनावी मैदान में भी असरदार साबित हो सकती है। इन चुनावों के नतीजे न सिर्फ राज्यों की सरकारें तय करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की नींव भी यहीं से रखी जाएगी।

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