इस वर्ष कीमती धातुओं के बाजार ने निवेशकों और आम ग्राहकों—दोनों को चौंका दिया। जहां सोने ने अपनी पारंपरिक मजबूती बनाए रखी, वहीं चांदी ने रिकॉर्डतोड़ तेजी के साथ बाजार में नई पहचान बना ली। वर्ष की शुरुआत में चांदी का भाव 98,900 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो 27 दिसंबर तक बढ़कर 2,52,735 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। यानी एक साल में चांदी ने करीब 155.6 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जो सोने से कहीं अधिक है।
सराफा बाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी को सोने की कीमत 78,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। पूरे वर्ष में लगातार बढ़त के बाद 27 दिसंबर को इसका भाव 1,43,700 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। इस तरह सोने ने लगभग 82.3 प्रतिशत का रिटर्न दिया। हालांकि यह रिटर्न निवेश के लिहाज से अच्छा माना जा रहा है, लेकिन आम ग्राहकों के लिए सोना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। कीमतों में इस तेज उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी पड़ा है। महिलाओं में जहां आभूषणों के लिए चांदी की ओर रुझान बढ़ा है, वहीं पुरुष वर्ग निवेश के नजरिये से चांदी को बेहतर विकल्प मान रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी की औद्योगिक मांग और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने इसकी कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
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उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के महामंत्री किशोर सेठ ने बताया कि वर्ष समाप्त होने में अभी कुछ दिन शेष हैं और इस दौरान कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है। मौजूदा रुझान को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि साल के अंतिम दिनों में भी सोने-चांदी के भाव ऊंचे बने रह सकते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सेठ के अनुसार फिलहाल लग्न का ऑफ-सीजन चल रहा है, जिससे बाजार में सीमित खरीदारी देखी जा रही है। इसके बावजूद कई लोग आगामी विवाह लग्न को ध्यान में रखते हुए अभी से गहनों की खरीदारी कर रहे हैं।
काशी सराफा मंडल के अध्यक्ष रवि सराफ का कहना है कि इस वर्ष बाजार में चांदी की तेजी ने निवेशकों को खासा लाभ दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही दोनों धातुओं ने मजबूती दिखाई हो, लेकिन रिटर्न के मामले में चांदी ने साफ तौर पर बाजी मार ली है। आने वाले महीनों में लग्न सीजन के नजदीक आते ही बाजार में फिर से हलचल तेज हो सकती है।
