- सिद्धार्थनगर जनपद के विकास खंड बढनी के ढेकहरी बुजुर्ग का मामला
- प्रधानी चुनाव लडने वाले कई लोगों को विना लडे हरा देने की साज़िश
विजय श्रीवास्तव
बढनी/सिद्धार्थनगर । उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विकास खंड बढनी के ग्राम पंचायत ढेकहरी बुजुर्ग में कई परिवारों के नाम मतदाता सूची से कथित तौर पर जानबूझकर हटा दिए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि यह सब संभावित प्रत्याशियों को चुनाव मैदान से बाहर करने की साजिश का हिस्सा है। इस मामले ने लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब गांव निवासी अजय कुमार अग्रहरि ने अपने पूरे परिवार का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरकर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज सौंपे। लेकिन आरोप है कि न केवल नए नाम जोड़े गए, बल्कि परिवार की मुखिया वासमती देवी का नाम, जो पुरानी सूची में मौजूद था, भी काट दिया गया। अजय अग्रहरि के परिवार के कम से कम दस सदस्यों के नाम गायब बताए जा रहे हैं, जिनमें रीना, अंकित कुमार, विवेक कुमार, अंशिका, विकास कुमार, मीना अग्रहरि, धर्मेंद्र कुमार और शीला शामिल हैं। इसके अलावा गांव के अन्य निवासियों के नाम भी सूची से हटाए जाने का दावा किया गया है। इनमें रोजी, रोजी पुत्री जय कुमार, विद्यावती पतनी महेंद्र, दुर्गावती पत्नी राजेन्द्र, मुरलीधर चौधरी पुत्र कृष्ण नाथ ,रत्ना पत्नी विकास,आकाश पुत्र राजेन्द्र,मनीष रावत पुत्र जय कुमार,सोहन लाल पुत्र गंगा राम,मगरे पुत्र गंगा राम, अवधेश पुत्र गंगा राम, राजकुमार पुत्र गंगा राम जैसे नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब प्रभावशाली लोगों की ओर से किया गया ताकि विरोधी पक्ष के उम्मीदवार बिना लड़े ही हार जाएं।

26 दिसंबर 2025 को अजय अग्रहरि और अन्य पीड़ितों ने उप जिलाधिकारी शोहरतगढ़ को लिखित शिकायत सौंपी। इसमें बीएलओ पर पक्षपात और साजिश का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत की प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारी, विकास खंड अधिकारी बढनी, राज्य निर्वाचन आयोग, मुख्यमंत्री कार्यालय और मीडिया को भी भेजी गई हैं। गांव के जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि ऐसे हथकंडे जारी रहे तो निष्पक्ष चुनाव की कल्पना बेमानी हो जाएगी। पंचायत चुनावों में मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी शिकायतें लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती हैं और प्रशासन को तत्काल जांच कर दोषियों पर एक्शन लेना चाहिए। इस मामले में यदि आरोप साबित हुए तो यह चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा असर डालेगा। पीड़ितों को उम्मीद है कि उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से उनके नाम बहाल होंगे और चुनाव निष्पक्ष तरीके से होंगे।
