कांग्रेस सांसद शशि थरूर के विदेश नीति से जुड़े बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उनके बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शशि थरूर के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने सच बोलने की हिम्मत दिखाई है और अप्रत्यक्ष रूप से राहुल गांधी को आईना दिखाया है।
शहजाद पूनावाला ने कहा कि विदेश नीति किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश से जुड़ा विषय होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देते रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी कांग्रेस नेता राजनीति करते हैं, जिससे देश की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी पार्टी और राष्ट्रहित से ज्यादा परिवार के हित को प्राथमिकता देते हैं। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी की भाजपा से नफरत धीरे-धीरे भारत से नफरत में तब्दील होती नजर आती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस पार्टी में जो नेता राष्ट्रीय हित की बात करता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है और शशि थरूर जैसे नेताओं पर कार्रवाई की जा सकती है।
CWC बैठक में बड़ा फैसला: वीबी-जी राम जी कानून के खिलाफ सड़क पर उतरेगी कांग्रेस
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस नेता वी हनुमंत राव ने अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और हर नागरिक को अपनी राय रखने का अधिकार है। हनुमंत राव के मुताबिक, शशि थरूर का बयान उनकी व्यक्तिगत सोच हो सकता है, जरूरी नहीं कि वही पार्टी की आधिकारिक राय हो।
हनुमंत राव ने यह भी कहा कि कांग्रेस में विचारों की विविधता है और अलग-अलग राय रखने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि यदि ऐसा बयान किसी अन्य पार्टी में दिया गया होता, तो संभव है कि तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र मौजूद है।
गौरतलब है कि शशि थरूर ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं बल्कि भारत की होती है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई नेता प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय हार पर खुशी मनाता है, तो वह असल में भारत की हार पर खुश हो रहा होता है। थरूर ने इस संदर्भ में पंडित जवाहरलाल नेहरू के कथन का उल्लेख करते हुए कहा था—“अगर भारत ही नहीं बचेगा, तो कौन जिएगा?”
